ईरान पर अमेरिका का नया एक्शन, मोजतबा खामेनेई से जुड़े वित्तीय साम्राज्य पर प्रतिबंध

अमेरिका ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से जुड़े कई लोगों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाकर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है. अमेरिका ने एक प्रमुख कारोबारी समेत कुल 14 लोगों और संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में रखा है.

Date Updated Last Updated : 11 July 2026, 10:40 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है. शुक्रवार को वाशिंगटन ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से जुड़े एक बड़े वित्तीय नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करते हुए कई नए प्रतिबंधों की घोषणा की. अमेरिका ने एक प्रमुख कारोबारी समेत कुल 14 लोगों और संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में रखा है. माना जा रहा है कि यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए हालिया हमलों के बाद ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है.

अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र दुबई में रहने वाले ईरानी बैंकर और व्यवसायी अली अंसारी हैं. अमेरिका का आरोप है कि अंसारी लंबे समय से ऐसे वित्तीय नेटवर्क चला रहे थे, जिनके जरिए ईरान की सत्ता और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आर्थिक मदद पहुंचाई जाती थी. ब्रिटेन भी पहले अंसारी पर इसी तरह के आरोपों के आधार पर प्रतिबंध लगा चुका है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक धन का उपयोग विदेशों में बड़ी मात्रा में संपत्तियां खरीदने और व्यावसायिक निवेश करने में किया.

विदेशों में फैला निवेश का बड़ा जाल

वित्त मंत्रालय के मुताबिक अंसारी ने कई देशों में फर्जी कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर करोड़ों डॉलर की संपत्ति खड़ी की. यह पूरा नेटवर्क सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत स्मार्ट ग्लोबल लिमिटेड नामक कंपनी के जरिए संचालित किया जाता था. जांच में सामने आया कि इस कंपनी ने यूरोप, खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रियल एस्टेट और व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश किया. अमेरिका का दावा है कि इन निवेशों से होने वाला लाभ केवल अंसारी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका फायदा ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा प्रतिष्ठान को भी मिलता था.

अमेरिकी वित्त विभाग का कहना है कि कई संपत्तियां भले ही अंसारी के नाम पर दर्ज थीं, लेकिन उनके वास्तविक लाभार्थी मोजतबा खामेनेई, उनका परिवार और ईरानी शासन से जुड़े प्रभावशाली लोग थे. अमेरिका का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण अंसारी वर्षों तक किसी कानूनी कार्रवाई से बचते रहे और उन्होंने ईरानी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाने वाले वित्तीय नेटवर्क का संचालन जारी रखा.इस्लाम

एक्सचेंज हाउस और विदेशी कंपनियां भी कार्रवाई के दायरे में

अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने ईरान के तीन एक्सचेंज हाउसों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं. एजेंसी का आरोप है कि ये संस्थाएं प्रतिबंधित ईरानी बैंकों के लिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कराने में मदद करती थीं और अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल करती थीं. इसके अलावा हांगकांग की CDM Trading Limited और संयुक्त अरब अमीरात की Naba Alzaki Raw Materials Trading LLC को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इन कंपनियों की भूमिका ईरानी वित्तीय नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बनाए रखने में रही है.

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान के सत्तारूढ़ वर्ग को मिलने वाली आर्थिक मदद के रास्तों को बंद करना है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे हर नेटवर्क को निशाना बनाएगा जो ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाने में मदद करता है. वहीं वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका भविष्य में भी मोजतबा खामेनेई और ईरान के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से अलग करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा.

इन प्रतिबंधों की घोषणा ऐसे समय हुई है जब हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ पहले हुआ युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि तेहरान के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने के लिए अमेरिका तैयार है.

समझौते पर उठे नए सवाल

ईरान ने अमेरिका के ताजा प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा है कि यदि पिछले महीने हुए समझौते की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया तो वह अपने हितों की पूरी ताकत से रक्षा करेगा. ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि दबाव और प्रतिबंधों से उसकी नीति नहीं बदलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नई कार्रवाई दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन की भावना के विपरीत दिखाई देती है. उस समझौते में नए प्रतिबंध न लगाने और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य गतिविधियां सीमित रखने की बात कही गई थी. 

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