मध्य पूर्व में छिड़ा भीषण संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में पहुंच चुका है और इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करने लगी है. शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉबर्ट पेप ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में एक डरावनी तस्वीर पेश की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इस युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो सकती है जिसका सबसे बुरा असर भारत और 'ग्लोबल साउथ' के गरीब देशों पर पड़ेगा. पेप का मानना है कि वर्तमान संकट ने ईरान को पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली बना दिया है.
प्रोफेसर रॉबर्ट पेप के अनुसार इस युद्ध के और अधिक विनाशकारी होने की 70 प्रतिशत संभावना है. उनका मानना है कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर जमीनी हमला कर सकता है जिससे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा. पेप ने स्पष्ट किया कि अमीर देश तो महंगाई झेल लेंगे लेकिन विकासशील और गरीब देशों को न केवल भारी कीमतें चुकानी पड़ेंगी बल्कि उन्हें ईंधन और भोजन की वास्तविक कमी का सामना भी करना होगा.
युद्ध के 29 दिनों के भीतर ईरान एक नई तेल महाशक्ति के रूप में उभरा है. रॉबर्ट पेप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा नियंत्रण है और वह दुनिया की 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की ताकत रखता है. अमेरिका की यह सोच कि ईरान एक कमजोर पक्ष है अब गलत साबित हो रही है. वास्तव में ईरान का दबदबा बढ़ रहा है और वह वैश्विक तेल बाजार में एक निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में आ गया है.
आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के लगभग ढाई अरब लोगों को ईंधन की भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है. यह संकट केवल गाड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि खाना पकाने और खेती के लिए जरूरी उर्वरकों तक फैल जाएगा. प्रोफेसर पेप ने डराते हुए कहा कि हमने अभी इस युद्ध के वास्तविक आर्थिक प्रभावों को महसूस करना शुरू भी नहीं किया है. सबसे गरीब देशों के लिए यह स्थिति भुखमरी और आर्थिक तबाही जैसी चुनौती पेश कर सकती है जो काफी चिंताजनक है.
इस संघर्ष का सबसे बड़ा शिकार भारत जैसे देश हो सकते हैं. पेप के अनुसार भारत के लिए तेल की आपूर्ति लगभग शून्य हो सकती है जबकि अमेरिका अपनी घरेलू मांग पूरी कर लेगा. हालांकि वहां भी कीमतें बहुत बढ़ेंगी लेकिन भारत के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा. चूंकि दुनिया प्रतिदिन 10 करोड़ बैरल तेल खपाती है और 20 प्रतिशत की कमी को कोई अन्य देश पूरा नहीं कर सकता इसलिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए कड़े फैसले लेने होंगे.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अब धीरे-धीरे ईरान के प्रति अपना रुख नरम कर रहा है. हालांकि नई दिल्ली अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहती लेकिन जमीनी हकीकत उसे तेहरान के करीब ले जा रही है. भारतीय टैंकर अब होर्मुज से गुजर रहे हैं जो सीधे तौर पर ईरान के साथ हुई गुप्त बातचीत का नतीजा है. पेप ने यह भी जोड़ा कि इस युद्ध के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ रही है जो वैश्विक राजनीति बदल सकती है.