हमले के डर से ईरान ने छिपाया 500 किलो बम ग्रेड यूरेनियम! सुरंगें सील, बारूदी सुरंगें बिछाईं, अब निकालना लगभग नामुमकिन

संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंका के बीच ईरान ने अपने लगभग 500 किलो अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को भूमिगत सुरंगों में सुरक्षित कर दिया है.

Date Updated Last Updated : 14 June 2026, 12:26 PM IST
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Courtesy: Gemini

नई दिल्ली: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. रिपोर्टों के अनुसार, संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच ईरान ने अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के बड़े भंडार को भूमिगत सुरंगों में इस तरह सुरक्षित कर दिया है कि उसे बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो गया है. इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ताओं को और जटिल बना दिया है.

भूमिगत सुरंगों को किया गया सील

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने उन भूमिगत सुरंगों के प्रवेश मार्गों को बंद कर दिया है जहां यूरेनियम रखा गया था. बताया जा रहा है कि कई रास्तों को मलबे से भर दिया गया है और कुछ स्थानों पर सुरक्षा के लिए बारूदी सुरंगें भी बिछाई गई हैं. माना जा रहा है कि यह कदम संभावित बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए उठाया गया है.

अमेरिका की चिंता बढ़ी

अमेरिका लंबे समय से इस बात को लेकर चिंतित रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है. इसी वजह से अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपे या नष्ट करे, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह प्रक्रिया काफी कठिन दिखाई दे रही है.

परमाणु समझौते पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरंगों को बंद करने के बाद किसी भी संभावित समझौते को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. यदि भविष्य में कोई समझौता होता भी है, तो यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालना और उसकी जांच करना एक बड़ा तकनीकी और सुरक्षा संबंधी काम होगा.

उठ रहे हैं नए सवाल

कुछ परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है कि पूरा यूरेनियम भंडार वास्तव में सामने लाया गया है या नहीं. इससे पारदर्शिता और निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं.

विशेषज्ञों के सामने बड़ी चुनौती

यूरेनियम को निकालने और निष्क्रिय करने के लिए विशेष उपकरणों, भारी मशीनों और सुरक्षा विशेषज्ञों की जरूरत पड़ सकती है. जानकारों का मानना है कि यह प्रक्रिया हफ्तों नहीं बल्कि महीनों तक चल सकती है. ऐसे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वैश्विक चिंता और बढ़ गई है.

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा हुआ माना जा रहा है.

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