नई दिल्ली: इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हवाई और ड्रोन हमले किए. लेबनानी मीडिया के अनुसार इन हमलों में कम से कम पांच लोगों की जान चली गई, जबकि कई इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंकाओं को जन्म दे दिया है.
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, नबातीह क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों में रातभर इजरायली लड़ाकू विमानों और ड्रोन की गतिविधियां देखी गईं. कई स्थानों पर हवाई हमले किए गए, जिनमें रिहायशी मकान और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, भोर से पहले कुछ इलाकों में तोपखाने से भी गोलाबारी की गई. हमलों के कारण लोगों में दहशत का माहौल बन गया और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया जब इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी सीमा संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम लागू किया गया था. हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष काफी तेज हो गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम से पहले युद्धविराम प्रभावी हो गया था. इस समझौते की पुष्टि इजरायल और हिजबुल्लाह से जुड़े सूत्रों ने भी अलग-अलग स्तर पर की थी.
सूत्रों के मुताबिक, इस युद्धविराम को लागू कराने में अमेरिका और कतर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वहीं, ईरान की ओर से भी बातचीत को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया गया. कूटनीतिक प्रयासों का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान में हालात को स्थिर करना और क्षेत्र में चल रही अन्य महत्वपूर्ण वार्ताओं को प्रभावित होने से बचाना था. हालांकि, ताजा हमलों ने इन कोशिशों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
पिछले कुछ दिनों में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुई झड़पें बेहद घातक साबित हुई हैं. रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में हुए इजरायली हमलों में करीब 40 लोगों की मौत हुई थी. वहीं, हिजबुल्लाह की जवाबी कार्रवाई में इजरायल के चार सैनिक मारे गए थे. इसी बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन शुरुआती घंटों में ही इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं.
इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि सेना अपने सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. उन्होंने बताया कि कुछ रणनीतिक क्षेत्रों में सैन्य अभियान जारी हैं. इजरायल का आरोप है कि हिजबुल्लाह युद्धविराम के बावजूद अपने सैन्य ढांचे को सक्रिय बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. इसी कारण सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जा रहे हैं.
लेबनान में जारी तनाव का असर व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है. अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता को लेकर पहले ही चिंताएं जताई गई थीं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीमा पर तनाव दोबारा बढ़ता है तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चल रही बातचीत प्रभावित हो सकती है.