नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में कई महीनों से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक समाधान की नई उम्मीद दिखाई दे रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार से नई बातचीत शुरू होगी. उन्होंने कहा कि संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है ताकि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके. हालांकि, ईरान ने अब तक इस प्रस्तावित वार्ता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित वार्ता में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रमुख मुद्दा रहेगा. यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि इस मार्ग पर तनाव खत्म हो और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में ठोस समाधान निकले. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत किस स्थान पर होगी और इसमें किन प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी.
दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह ओमान के साथ होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाले एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग को लेकर समझौते के करीब पहुंच चुका है. इसी बीच इस इलाके के पास एक तेल टैंकर में विस्फोट की घटना भी सामने आई, जिसने क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं. यह घटना बताती है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और रणनीतिक रूप से यह इलाका अब भी संवेदनशील बना हुआ है.
ट्रंप की ओर से बातचीत की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिली. सोमवार को एशियाई बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल करीब 4.7 प्रतिशत टूटकर 80.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी से जारी है. उसी दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त कार्रवाई की थी. इसके बाद कई बार बातचीत और तनाव कम होने के संकेत मिले, लेकिन बीच-बीच में सैन्य गतिविधियां फिर तेज होती रहीं. हाल ही में ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले की चेतावनी भी दी थी, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था.
ट्रंप ने अब दावा किया है कि अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की थी. उनके अनुसार, यदि हमला होता तो वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य अभियान हो सकता था. हालांकि, ईरानी मीडिया ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान ने ऐसी कोई अपील नहीं की थी. वहीं ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता हसन गशगावी ने कहा कि मध्यस्थ दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौता ज्ञापन को दोबारा लागू कराने की कोशिश कर रहे हैं.