नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर तेहरान लाया गया, जिसके साथ कई दिनों तक चलने वाले अंतिम विदाई कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हो गई. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं, इसलिए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को विशेष रूप से मजबूत किया गया है.
ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, अली खामेनेई के पार्थिव शरीर वाले ताबूत को उस स्थान पर भी ले जाया गया, जहां उनकी मृत्यु हुई थी. इस कार्यक्रम की पहले से सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई थी. सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह अंतिम विदाई समारोह का एक अहम हिस्सा था, जिसमें सीमित लोगों की मौजूदगी रही.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) का अनुमान है कि 4 और 5 जुलाई को तेहरान में होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में रिकॉर्ड संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं. शुरुआती आकलन के अनुसार 1.2 से 1.5 करोड़ लोगों के पहुंचने की संभावना है, जबकि कुछ अनुमान यह संख्या 2 करोड़ तक बताते हैं. इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं की व्यापक तैयारियां की हैं.
ईरान सरकार ने जानकारी दी कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात कर अली खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया. सरकार के अनुसार, इस बातचीत के दौरान क्षेत्रीय हालात, होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान में युद्धविराम और जारी कूटनीतिक वार्ताओं जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई.
घाना स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर वर्ष 2016 में तत्कालीन घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा और अली खामेनेई की मुलाकात को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी. दूतावास ने कहा कि उस मुलाकात में व्यापारिक समझौतों से ज्यादा अफ्रीका के भविष्य और स्वतंत्र देशों के सहयोग पर चर्चा हुई थी.
पोस्ट में यह भी कहा गया कि अली खामेनेई का मानना था कि चरमपंथ बाहरी ताकतों के समर्थन से फैलता है और इसका समाधान स्वतंत्र देशों के आपसी सहयोग में है. उन्होंने अफ्रीका को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर देशों का समूह माना था.
भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा 4 जुलाई को ईरान जाकर अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनकी यात्रा का उद्देश्य दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देना और आधिकारिक स्तर पर भारत की संवेदना प्रकट करना है.
भारत में ईरान के वर्तमान नेतृत्व के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि सुरक्षा कारणों से नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि इजरायल से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरे और निगरानी की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अंतिम विदाई समारोह 4 जुलाई की सुबह तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा. यहां लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर मिलेगा. इसके बाद 5 जुलाई की सुबह अंतिम संस्कार की नमाज अदा की जाएगी और फिर अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वान, कुरान पाठकर्ता, सांस्कृतिक समूह और अन्य अतिथि भी शामिल होंगे.