नई दिल्ली: अमेरिका ने जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारत से आयात होने वाले कुछ सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है. यह निर्णय अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की जांच के बाद लिया गया है और नई दरें शुक्रवार से लागू कर दी गई हैं. अमेरिका का कहना है कि जिन देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, उन पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है.
USTR के अनुसार, यह कार्रवाई सेक्शन 301 जांच के आधार पर की गई है. अमेरिका का मानना है कि वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी से तैयार होने वाले उत्पादों को खत्म करना जरूरी है. इसी उद्देश्य से उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जहां श्रम मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई.
शुरुआत में माना जा रहा था कि भारत पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है. हालांकि, श्रम मानकों को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद भारत को 10 प्रतिशत वाले निचले स्लैब में रखा गया. इससे भारत पर संभावित अधिक शुल्क का बोझ कम हो गया.
भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, कनाडा, मेक्सिको, अर्जेंटीना समेत कई देशों को भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वाले समूह में शामिल किया गया है. वहीं, कुछ अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, संभावित अतिरिक्त टैरिफ को देखते हुए भारत ने पहले ही फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान और निगरानी के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए थे. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करना और निर्यात पर पड़ने वाले असर को कम करना है.