नई दिल्ली: रंग, उमंग और आपसी प्रेम से भरा होली का त्योहार आते ही पूरे देश का माहौल बदल सा जाता है. गलियों से लेकर बड़े शहरों तक हर जगह खुशियों की बौछार दिखाई देती है. यह सिर्फ रंग खेलने का दिन नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और रिश्तों में नई मिठास घोलने का अवसर भी है. होली केवल रंगों का ही नहीं बल्कि सर्दी के जाने और बसंत के स्वागत का त्योहार भी माना जाता है.
लेकिन अब सवाल यह है कि इस साल होली कब मनाया जाएगा. कुछ लोगो का कहना है कि इस बार होली 3 मार्च को मनाया जाएगा तो वहीं कुछ का कहना है कि 4 मार्च को होली खेली जाएगी. बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जोकि फरवरी या मार्च में पड़ती है. लेकिन इस साल पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी.
बताया जा रहा है कि इस साल होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को प्रदोष काल में मनाया जाएगा. होलिका के अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है. यानी की चार तारीख को होली मनाई जाएगी.
होलिका की पूजा के लिए सुबह ही नहाकर साफ सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं. इस दिन लोग शाम को पूजा की थाली लेकर होलिका दहन की जगह पर जाकर उसमें उपले, माला, रोली, अक्षत, हल्दी, गुड़ आदि डालते हैं.
पंचांग के अनुसार होलिका दहन के बाद चंद्र ग्रहण लगेगा. ग्रहण 3 मार्च को 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम के 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, इस ग्रहण को भारत में देखा जा सकेगा.
होली को प्रेम, क्षमा और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं होली के त्योहार में लोग अपने पुराने सभी गिले शिकवे भुलाकर प्यार से एक साथ होली मनाते हैं. आपसी मतभेद भुलाकर भेदभाव को भुलाकर सभी लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं.
यह त्योहार नई शुरुआत, आशा और सकारात्मकता का प्रतीक है. होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इसका केवल धार्मिक ही नहीं नहीं बल्कि सामाजिक महत्व भी है.