चंडीगढ़: पंजाब सरकार मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ा रही है. इस योजना के तहत हजारों मरीजों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निःशुल्क नेत्र सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. इससे उपचार में होने वाली देरी कम हुई है, विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा तक लोगों की पहुंच आसान हुई है और विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हुआ है.
योजना के आंकड़ों के अनुसार अब तक 3,524 मरीजों की आंखों की सर्जरी लगभग 1 करोड़ 98 लाख 68 हजार 890 रुपये की लागत से पूरी तरह निःशुल्क की जा चुकी है. इनमें सबसे अधिक संख्या मोतियाबिंद के ऑपरेशनों की रही है, क्योंकि यह बुजुर्गों में अंधत्व का प्रमुख कारण माना जाता है. सबसे अधिक 3,070 मरीजों की स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (SICS) नॉन-फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस (IOL) के साथ की गई, जिस पर कुल 1 करोड़ 54 लाख 40 हजार 380 रुपये खर्च हुए. यह योजना के तहत की गई सभी नेत्र सर्जरियों का 87 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है.
इसके अलावा प्टेरीजियम विद कंजंक्टाइवल ऑटोग्राफ्ट दूसरी सबसे अधिक की जाने वाली प्रक्रिया रही, जिसके तहत 333 मरीजों का उपचार किया गया और इस पर 31 लाख 83 हजार 300 रुपये खर्च किए गए. योजना के अंतर्गत 28 एंट्रोपियन करेक्शन, 12 एक्ट्रोपियन करेक्शन, बच्चों की लेंस सर्जरी, ग्लूकोमा का उपचार, टियर डक्ट सर्जरी सहित कई अन्य प्रकार की नेत्र सर्जरियां भी निःशुल्क की गई हैं. इससे सभी आयु वर्ग के मरीजों को आधुनिक नेत्र उपचार की सुविधा मिल रही है.
गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीश धवन ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना आधुनिक नेत्र उपचार को हर वर्ग के लिए सुलभ और किफायती बना रही है. उन्होंने कहा, "इस योजना के तहत मरीजों को अत्याधुनिक नेत्र उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है. फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस के साथ आधुनिक फेकोइमल्सिफिकेशन मोतियाबिंद सर्जरी भी मुफ्त की जाती है. इसके अलावा, समय पर उपचार न मिलने पर अंधत्व का कारण बनने वाले ग्लूकोमा के इलाज को भी योजना में शामिल किया गया है, जिससे मरीजों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता."
डॉ. मुनीश धवन ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई है, क्योंकि आर्थिक तंगी के कारण कई लोग समय पर इलाज नहीं करा पाते थे. उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत की जा रही नेत्र सर्जरियां बुजुर्ग मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हुई हैं. मोतियाबिंद जैसी सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण सर्जरियां अब पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गई हैं. इससे मरीजों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है और वे अधिक आत्मनिर्भर बन रहे हैं." उन्होंने आगे बताया कि योजना के तहत स्क्विंट (भेंगापन) का ऑपरेशन भी पूरी तरह निःशुल्क किया जाता है.
डॉ. मुनीश धवन ने आंखों की बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों की नियमित दृष्टि जांच, 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की समय-समय पर आंखों की जांच तथा डायबिटीज के मरीजों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है, क्योंकि मधुमेह आंखों की रोशनी पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को शामिल किए जाने से पूरे राज्य में आधुनिक नेत्र उपचार सेवाएं अधिक सुलभ हो गई हैं. उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी सेवाओं का विस्तार कर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिक से अधिक मरीजों को समय पर निःशुल्क नेत्र सर्जरी का लाभ मिल सके. समय पर उपचार से दृष्टि संबंधी जटिलताओं को रोका जा सकता है और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है."
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की कि धुंधला दिखाई देना, आंखों में लगातार जलन होना, अत्यधिक पानी आना या पलकों से जुड़ी किसी भी प्रकार की असामान्यता जैसे लक्षणों को हल्के में न लें. उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है और आंखों की रोशनी सुरक्षित रखी जा सकती है.
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना रही है. इसके माध्यम से पात्र मरीजों को सामान्य से लेकर विशेष नेत्र सर्जरियों तक की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. इससे हजारों लोग बेहतर उपचार प्राप्त कर स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं."