पंजाब में शिक्षा का नया दौर, पहली से 12वीं तक AI पढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला

पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मुख्य विषय के रूप में शामिल करने का फैसला किया है.

Date Updated Last Updated : 22 July 2026, 10:34 PM IST
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Courtesy: Punjab

चंडीगढ़: पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मुख्य विषय के रूप में शामिल करने का फैसला किया है. इस दूरदर्शी कदम के साथ पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है. जिसने प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक एआई साक्षरता को अनिवार्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया है. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड इस पूरे अभियान को 'सरबत.एआई' परियोजना के तहत  लागू करेगा.

मनीष सिसोदिया ने की परियोजना की शुरुआत

पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की उपस्थिति में इस राज्यस्तरीय एआई शिक्षा मिशन का औपचारिक शुभारंभ किया. इस अवसर पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ टेक उद्योग के कई प्रमुख विशेषज्ञ भी मौजूद थे.

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब जिस तरह देश में हरित क्रांति का अग्रदूत रहा है. उसी तरह अब यह राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्रांति का नेतृत्व करने के लिए तैयार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल छात्रों को एआई का उपयोग सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निर्माता और नैतिक डिजिटल नागरिक के रूप में विकसित करना है.

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31.5 लाख विद्यार्थियों और 25,172 स्कूलों को मिलेगा लाभ

'सरबत.एआई' परियोजना के तहत राज्य के 25,172 स्कूलों के लगभग 31.5 लाख विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ा जाएगा. पहले चरण में 12,424 कंप्यूटर साइंस शिक्षक इस व्यवस्था की कमान संभालेंगे. जबकि आने वाले समय में 2 लाख से अधिक शिक्षकों को एआई-आधारित शिक्षण और मूल्यांकन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा.

अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर आधारित है नया पाठ्यक्रम

पंजाब  सरकार द्वारा तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम सिंगापुर, फिनलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणालियों के गहन अध्ययन के बाद विकसित किया गया है. इसके अलावा, इसे यूनेस्को के 'नैतिक एआई ढांचे' के साथ जोड़ा गया है ताकि छात्र तकनीक के सुरक्षित, जिम्मेदार और नैतिक इस्तेमाल के सिद्धांतों को आत्मसात कर सकें.

सरकार

दो चरणों में लागू होगा एआई पाठ्यक्रम

इस महत्वाकांक्षी योजना को दो व्यवस्थित चरणों में विभाजित किया गया है.

पहला चरण: इसे आठवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए लागू किया जाएगा. इसमें कंप्यूटर साइंस विषय के साथ एआई को शामिल किया जाएगा. छात्रों की पढ़ाई के लिए लाइव ऑनलाइन क्लास, रिकॉर्डेड लेक्चर, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और एक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम  का इस्तेमाल किया जाएगा.

दूसरा चरण: इस चरण में पहली से सातवीं कक्षा के छोटे बच्चों के लिए पाठ्यक्रम में एआई के मूलभूत सिद्धांतों को शामिल किया जाएगा.

वैश्विक टेक कंपनियों का रणनीतिक सहयोग

एआई साक्षरता और कार्यबल की तैयारी को मजबूत करने के लिए गूगल, इंटेल, कैनवा और FA-AI जैसी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के साथ रणनीतिक भागीदारी की गई है. पीएसईबी के चेयरमैन डॉ. अमरपाल सिंह ने बताया कि एआई के अंक अब छात्रों के बोर्ड प्रमाण पत्रों पर भी दर्ज किए जाएंगे.

राष्ट्रीय स्तर पर पंजाब ने स्थापित किया नया मानदंड

कार्यक्रम के दौरान आप नेता मनीष सिसोदिया ने पंजाब सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने एआई शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानदंड स्थापित किया है. उन्होंने कहा कि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तर्ज पर प्राथमिक स्तर से तकनीक सिखाने से पंजाब के युवा आने वाले 5 से 8 वर्षों में वैश्विक मंचों पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने देश में हाल ही में सामने आई परीक्षा पत्र लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए एआई के जरिए परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया.

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