पंजाब में बढ़ी ऑर्थोपेडिक इलाज की मांग, सेहत योजना के तहत 84 करोड़ रुपये खर्च

पंजाब में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक ऑर्थोपेडिक उपचारों पर 84 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 45 लाख से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़कर कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं.

Date Updated Last Updated : 03 June 2026, 11:14 AM IST
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Courtesy: X @BhagwantMann

चंडीगढ़: पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटनाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत ऑर्थोपेडिक उपचारों पर अब तक 84 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा चुका है, जो राज्य में बढ़ती स्वास्थ्य जरूरतों और सरकारी चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को दर्शाता है.

पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लाखों लोगों को कैशलेस इलाज का लाभ मिल रहा है. योजना के आंकड़े बताते हैं कि हड्डी और जोड़ संबंधी बीमारियों के इलाज की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते ऑर्थोपेडिक सेवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुकी हैं.

45 लाख से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक 45 लाख से ज्यादा लोगों का पंजीकरण हो चुका है. लुधियाना में सबसे अधिक 4.8 लाख से ज्यादा और पटियाला में करीब 4.1 लाख लाभार्थी इस योजना से जुड़े हैं.

योजना के माध्यम से लोगों को सरकारी अस्पतालों में कई जटिल उपचार और सर्जरी कैशलेस सुविधा के साथ उपलब्ध कराई जा रही हैं.

घुटना प्रत्यारोपण और फ्रैक्चर उपचार के मामले सबसे अधिक

आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत सबसे ज्यादा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) के मामले सामने आए हैं. इसके अलावा कूल्हे की सर्जरी और प्लेट, नेल्स व अन्य इम्प्लांट्स के जरिए फ्रैक्चर फिक्सेशन की प्रक्रियाएं भी बड़ी संख्या में की गई हैं.

इन उपचारों को अब जिला अस्पतालों और बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थानों में नियमित रूप से कैशलेस सुविधा के तहत किया जा रहा है.

बढ़ती उम्र के साथ बढ़ रही ऑर्थोपेडिक समस्याएं

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में बढ़ती उम्र की आबादी के कारण जोड़ों का घिसाव, लगातार दर्द और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. सरकारी अस्पतालों में घुटने और कूल्हे की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

ऑर्थोपेडिक उपचारों में महंगे इम्प्लांट्स, लंबा इलाज और पुनर्वास की जरूरत होती है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है.

गुलशन तनेजा को मिला कैशलेस इलाज

राजपुरा के पास खेड़ा गज्जू निवासी 43 वर्षीय गुलशन तनेजा को फैक्ट्री में काम के दौरान चोट लग गई थी. इसके बाद उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी और घुटने में दर्द व सूजन लगातार बनी रही.

6 मई को उन्हें राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती कराया गया और अगले दिन लिगामेंट टियर का इलाज किया गया. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत उन्हें 86,750 रुपये का उपचार पूरी तरह कैशलेस मिला. इलाज के बाद 12 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूँ. सेहत कार्ड का शुक्रिया कि मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा. यह योजना हमारे जैसे परिवारों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम कर रही है और महँगे इलाज को सुलभ बना रही है.”

स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ लगातार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिससे पंजाब में सुलभ और किफायती सर्जिकल देखभाल को और मज़बूत करने की आवश्यकता सामने आई है."

उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत हजारों मरीजों को कैशलेस घुटना, कूल्हा और ट्रॉमा उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनका आर्थिक बोझ कम हो रहा है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आ रहा है.

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