अमृतपाल और उसके साथियों की रिहाई के लिए आठ अप्रैल को निकाला जाएगा चेतना मार्च

एडवोकेट सियालका ने कहा कि अमृतपाल सिंह और उनके साथियों पर लगाया गया एएनएसए पूरी तरह से गैरकानूनी है। परिवार द्वारा बुलाई गई पंथक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार इन सिखों का पंजाब में परिवर्तन स्वीकार नहीं करती है तो पंजाब के लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक चेतना मार्च शुरू किया जाना चाहिए।

Date Updated Last Updated : 05 April 2024, 09:41 AM IST
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असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह और उनके सहयोगियों के परिवार के सदस्यों ने घोषणा की कि पंजाब के लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए 8 अप्रैल को तख्त श्री दमदमा साहिब से श्री अकाल तख्त साहिब तक जागरूकता मार्च निकाला जाएगा। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से चर्चा के बाद अमृतपाल सिंह की मां बीबी बलविंदर कौर, शिरोमणि कमेटी सदस्य और पंथक वकील भगवंत सिंह सियालका ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से मुलाकात की। इस मौके पर जत्थेदार से बंदी सिखों के मुद्दे पर बातचीत हुई।

अमृतपाल सिंह और उनके साथियों पर लगाया गया एएनएसए गैरकानूनी

इस मौके पर एडवोकेट सियालका ने कहा कि अमृतपाल सिंह और उनके साथियों पर लगाया गया एएनएसए पूरी तरह से गैरकानूनी है। परिवार द्वारा बुलाई गई पंथक बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार इन सिखों का पंजाब में परिवर्तन स्वीकार नहीं करती है तो पंजाब के लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक चेतना मार्च शुरू किया जाना चाहिए। यह पंजाब सरकार की बड़ी गलती है कि श्री अकाल तख्त साहिब से बनी कमेटी को मिलने का समय नहीं दिया गया। बंदियों की रिहाई के लिए हमें सरकार से बात करनी होगी और रास्ता निकालना होगा। सरकार उस तरफ नहीं आई, उल्टे एनएसए बढ़ा दी। हम सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे।

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