अपोलो 13 का 53 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, आर्टेमिस-2 चंद्रमा के पार पहुंचा; मंगल की उड़ान की हुई रिहर्सल

आर्टेमिस-II का क्रू चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहुंच गया है. यह मिशन इंसानों की अब तक की सबसे लंबी अंतरिक्ष यात्रा का रिकॉर्ड तोड़ने वाला है, जो पृथ्वी से 4,06,773 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचेगा.

Date Updated Last Updated : 06 April 2026, 06:57 PM IST
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53 साल का इंतजार खत्म हुआ. 6 अप्रैल, 2026 को आर्टेमिस-2 के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहुंच गए. यह मिशन अब अपोलो 13 का 4,00,171 किलोमीटर का रिकॉर्ड तोड़ते हुए **पृथ्वी से 4,06,773 किलोमीटर दूर तक जाएगा. यानी चंद्रमा से भी आगे, जहां अपोलो युग के बाद कोई इंसान नहीं गया.

कब होगी चंद्रमा के पास से उड़ान?

7 अप्रैल, 2026 को भारतीय समयानुसार रात 12:15 बजे आर्टेमिस-2 चंद्रमा के पास से अपनी उड़ान शुरू करेगा. क्रू चंद्रमा के दूसरी तरफ चक्कर लगाकर वापस लौटेगा. यह मिशन इतना खास क्यों है, क्योंकि यह सिर्फ चंद्रमा तक नहीं, बल्कि उसके पार की दुनिया का दरवाजा खोल रहा है.

फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्ट्री

आर्टेमिस-2 जिस रास्ते से जाएगा, उसे फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्ट्री कहते हैं. यानी अंतरिक्ष यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल करके बिना किसी इंजन के खुद ही पृथ्वी की ओर लौट आएगा. सबसे बड़ी बात अगर ओरियन का मुख्य प्रोपल्शन सिस्टम पूरी तरह फेल भी हो जाए, तब भी क्रू सुरक्षित घर लौट आएगा.

डीप स्पेस का खतरनाक सफर

अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पृथ्वी से मात्र 400 किलोमीटर ऊपर है. वहां धरती का मैग्नेटिक फील्ड सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, लेकिन 2,000 किलोमीटर से ऊपर, यह ढाल खत्म हो जाती है. आर्टेमिस-2 के यात्री कॉस्मिक रेडिएशन के उस स्तर का सामना करेंगे, जो अपोलो युग के बाद किसी ने नहीं देखा. यह डेटा मंगल मिशन के लिए सबसे अहम साबित होगा.

40,000 किमी/घंटा की रफ्तार से वापसी

जब ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करेगा, तो उसकी रफ्तार होगी लगभग 40,200 किलोमीटर प्रति घंटा. यह किसी भी क्रू वाले स्पेसक्राफ्ट की अब तक की सबसे तेज वापसी होगी. हीट शील्ड को 2,760 डिग्री सेल्सियस के तापमान का सामना करना पड़ेगा, जो सूरज की सतह के तापमान का लगभग आधा है.

चांद नहीं, मंगल है मंजिल

नासा साफ कह रहा है - चांद मंजिल नहीं है, यह तो रिहर्सल है. आर्टेमिस-2 का हर डेटा - रेडिएशन, स्पेसक्राफ्ट परफॉर्मेंस, इंसानी शरीर की प्रतिक्रिया सीधे मंगल मिशन में काम आएगा. पांच दशक बाद इंसान इतनी दूर गया है, और यह सिर्फ शुरुआत है.

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