Vaishno Devi accident: जम्मू-कश्मीर में मंगलवार शाम को हुई भारी बारिश और भूस्खलन ने भयंकर तबाही मचाई, जिसमें माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर 35 श्रद्धालुओं की जान चली गई. कई लोग अभी भी लापता हैं, जबकि घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इस त्रासदी के लिए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं.
उपमुख्यमंत्री का गुस्सा
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि जब मौसम विभाग ने भारी बारिश और भूस्खलन का हाई अलर्ट जारी किया था, तो यात्रा को क्यों नहीं रोका गया? श्राइन बोर्ड के चेयरमैन के रूप में एलजी मनोज सिन्हा को जवाब देना होगा.
#WATCH | Katra: During inspecting the flood-affected areas in the state, J&K Deputy CM Surinder Choudhary says, "Regarding the Vaishno Devi Yatra incident, LG Manoj Sinha should give an answer. During the LG's term, a stampede had also occurred earlier. When there was an alert… pic.twitter.com/Hu3kFE4SfO
— ANI (@ANI) August 28, 2025
चौधरी ने आगे कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी लापरवाही सामने आई है. पहले भी उनके कार्यकाल में भगदड़ जैसी घटनाएं हो चुकी हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की.
चौधरी ने गुस्से में कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से अनुरोध करता हूं कि एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जो इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करे. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. ये 35 श्रद्धालु मरे नहीं, इन्हें मारा गया है.
श्राइन बोर्ड पर लापरवाही का आरोप
कटरा के स्थानीय लोगों में भी इस हादसे को लेकर भारी आक्रोश है. लोगों ने श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की है. कटरा के शालीमार पार्क से मुख्य बस स्टैंड तक प्रदर्शन करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि श्राइन बोर्ड का वीवीआईपी कल्चर और लापरवाही इस हादसे का मुख्य कारण है. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "इतना बड़ा हादसा कैसे हो सकता है? श्राइन बोर्ड की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
जरूरतमंदों को मुफ्त ठहरने की सुविधा
इस दुखद घटना के बीच कटरा होटल एसोसिएशन ने मानवता का परिचय देते हुए प्रभावित लोगों की मदद के लिए कदम उठाया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वज़ीर ने घोषणा की, "हमने फैसला किया है कि सभी जरूरतमंद श्रद्धालुओं को 2-4 दिनों तक मुफ्त ठहरने की व्यवस्था दी जाएगी. जो लोग यहां फंसे हैं, वे हमारे नियंत्रण कक्ष के नंबर 9596002222 पर संपर्क कर सकते हैं. हम सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी श्रद्धालु बिना दर्शन किए न लौटे." उन्होंने कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सभी को एकजुट होकर पीड़ितों का साथ देना चाहिए.
जम्मू में बारिश ने तोड़ा रिकॉर्ड
इस हादसे का मुख्य कारण बनी भारी बारिश ने जम्मू में 115 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया. मंगलवार से बुधवार सुबह तक 24 घंटों में 380 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1910 के बाद सबसे अधिक है.
इस मूसलाधार बारिश ने जम्मू के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया और पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ क्षेत्रों में भी बाढ़ का कहर बरपाया. राहत और बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना को तैनात किया गया है.
राहत और बचाव कार्य जारी
हादसे के बाद प्रशासन और सेना ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं. लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है. उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से प्रभावित क्षेत्रों के लिए बड़े राहत पैकेज की मांग की है. हम पीड़ितों के लिए हर संभव मदद सुनिश्चित करेंगे.
जवाबदेही और जांच की मांगयह हादसा न केवल एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी परिणाम माना जा रहा है. उपमुख्यमंत्री और स्थानीय लोगों की मांग है कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो. माता वैष्णो देवी जैसे पवित्र तीर्थस्थल पर ऐसी घटनाएं न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं.