'सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति से आएगी शांति' मोदी ने बयान आया सामने, यूक्रेन-मिडिल ईस्ट में अराजकता!

दुनिया भर में विश्व युद्ध जैसे माहौल बने हुए हैं. हर देश एक-दूसरे के साथ लड़ रहा है. इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यूक्रेन और अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्धों को जल्द समाप्त करने का आह्वान किया.

Date Updated Last Updated : 05 March 2026, 02:51 PM IST
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नई दिल्ली: दुनिया भर में विश्व युद्ध जैसे माहौल बने हुए हैं. हर देश एक-दूसरे के साथ लड़ रहा है. इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यूक्रेन और अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्धों को जल्द समाप्त करने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद और कूटनीति है.  

ईरान-अमेरिका-इजराइल में जारी है युद्ध

बता दें मौजूदा समय में ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध हो रहे हैं. इसी बीच प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद मध्य पूर्व में अराजकता फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप तेहरान ने जवाबी हमले किए.

दिल्ली में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश कानून के शासन में दृढ़ विश्वास रखते हैं और वे यूक्रेन और मध्य पूर्व में दीर्घकालिक शांति के लिए प्रयास जारी रखेंगे.

सैन्य संघर्षों से विवादों का समाधान नहीं होते

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत और फिनलैंड कानून के शासन, संवाद और कूटनीति के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता रखते हैं. हमारा दृढ़ विश्वास है कि सैन्य संघर्षों से विवादों का समाधान नहीं हो सकता. यह बात यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थितियों पर भी समान रूप से लागू होती है. हम युद्धों की शीघ्र समाप्ति की कामना करते हैं और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे.

उन्होंने यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक फैली वैश्विक अस्थिरता पर प्रकाश डाला और कहा कि भारत और यूरोप स्थिरता और समृद्धि के लिए साझेदारी के 'स्वर्ण युग' में प्रवेश कर रहे हैं.

संबंधों के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे देश

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि, 'आज दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक, दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी है. ऐसे वैश्विक माहौल में, भारत और यूरोप, जो दुनिया की दो प्रमुख कूटनीतिक शक्तियां हैं, अपने संबंधों के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे हैं. हमारा बढ़ता सहयोग वैश्विक स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि को नई शक्ति प्रदान कर रहा है.'

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