केरल के ग्लोबल अयप्पा संगम में स्टालिन के निमंत्रण पर बीजेपी का हंगामा, हिंदू आस्था का अपमान या राजनीतिक नाटक?

केरल सरकार द्वारा पहली बार आयोजित होने वाले ग्लोबल अयप्पा संगम (20 सितंबर, पथानामथिट्टा) में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने से सियासी तूफान खड़ा हो गया है.

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Global Ayyappa Sangam: केरल सरकार द्वारा पहली बार आयोजित होने वाले ग्लोबल अयप्पा संगम (20 सितंबर, पथानामथिट्टा) में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने से सियासी तूफान खड़ा हो गया है.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस फैसले को हिंदू आस्था का “अपमान” करार देते हुए तीखा विरोध जताया है. दूसरी ओर, केरल सरकार और डीएमके ने इसे सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया है. आइए, इस विवाद की पूरी कहानी को समझते हैं.

स्टालिन का निमंत्रण

केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस निमंत्रण को हिंदू भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया. उन्होंने कहा, “स्टालिन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का यह कदम हिंदू भक्तों और सबरीमाला की परंपराओं का अपमान है. अगर दोनों नेताओं ने माफी नहीं मांगी, तो बीजेपी इस आयोजन में स्टालिन की भागीदारी का पुरजोर विरोध करेगी.”

चंद्रशेखर ने इंडी गठबंधन (कांग्रेस, सीपीआई(एम), और डीएमके) की तुलना हिटलर और ओसामा बिन लादेन जैसे चरित्रों से की, इसे “पाखंड की पराकाष्ठा” करार दिया. बीजेपी नेता तमिलिसाई सौंदरराजन ने स्टालिन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में स्टालिन ने हिंदू संगठनों के निमंत्रण ठुकराए, लेकिन केरल में अयप्पा संगम में शामिल होने का फैसला किया. यह हिंदू भक्तों के साथ मजाक है.” बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर विवादित बयान का हवाला देते हुए कहा कि स्टालिन परिवार ने कभी इसकी निंदा नहीं की, फिर भी उन्हें धार्मिक आयोजन में बुलाया जाना हैरान करने वाला है.

केरल सरकार का जवाब

केरल के देवस्वम मंत्री वीएन वसावन ने इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर अयप्पा भक्तों को एकजुट करने का प्रयास बताया. उन्होंने कहा, “ग्लोबल अयप्पा संगम त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड और राज्य सरकार का एक ऐतिहासिक आयोजन है. इसमें कर्नाटक, तेलंगाना के मंत्री, केंद्रीय मंत्री, विपक्षी नेता, और 3,000 से अधिक भक्त हिस्सा लेंगे.”

वसावन ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन पूरी तरह से सबरीमाला की परंपराओं और अनुष्ठानों के अनुरूप होगा. भक्तों के लिए आवास, चिकित्सा सुविधाएं, और विशेष परिवहन की व्यवस्था भी की गई है. 

बीजेपी का घमंड

केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने बीजेपी की धमकी को खारिज करते हुए कहा, “राजीव चंद्रशेखर केंद्र के समर्थन के घमंड में हैं. केरल में उनकी धमकियां नहीं चलेंगी. यह आयोजन सभी भक्तों को एकजुट करने का प्रयास है, न कि राजनीतिक विवाद का मंच.” 

ऐतिहासिक महत्व का आयोजन

डीएमके संगठन सचिव टीके एस इलंगोवन ने स्टालिन के फैसले का बचाव करते हुए कहा, “यह कोई धार्मिक पूजा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व का आयोजन है. स्टालिन को निमंत्रण मिला है, तो वह जाएंगे. बीजेपी का विरोध उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है.” उन्होंने बीजेपी को “ठगों का गिरोह” बताते हुए इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से तूल देने का आरोप लगाया.