पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों को झटका, कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल

अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आया है, जिससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों को झटका लगा है.

Date Updated Last Updated : 14 July 2026, 10:04 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद कर रहे लोगों को एक बार फिर झटका लगा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आने से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चिंता बढ़ गई है. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों में फिर आया उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.66 प्रतिशत बढ़कर 84.82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) भी लगभग 2 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. इससे पहले भी कच्चे तेल में बड़ी तेजी दर्ज की गई थी, जिससे बाजार में महंगाई की चिंता बढ़ गई है.

अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ा सैन्य संघर्ष है. दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद ने भी तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है.

एयरस्ट्राइक और जवाबी हमलों से बढ़ी चिंता

अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं. अमेरिका का दावा है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान की समुद्री हमले करने की क्षमता को कमजोर करना है. दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है. इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि सामान्य दिनों में जहां बड़ी संख्या में जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब आवाजाही काफी कम हो गई है. इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में तेल और ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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