नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) आने वाले वर्षों में परीक्षा परिणाम प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है. बोर्ड इस संभावना पर विचार कर रहा है कि छात्रों को डिजिलॉकर के माध्यम से मार्कशीट और प्रमाणपत्रों के साथ उनकी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी भी उपलब्ध कराई जाए.
यह प्रस्ताव ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे सवालों और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग के बीच सामने आया है. यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो छात्रों को उत्तर पुस्तिका देखने के लिए अलग से आवेदन और शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी.
ऑनस्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर सामने आई तकनीकी समस्याओं के बाद केंद्र सरकार और सीबीएसई परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर रहे हैं. इसी क्रम में डिजिलॉकर के जरिए छात्रों को सीधे उनकी उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है.
बताया जा रहा है कि कक्षा 12वीं के पुनर्मूल्यांकन के परिणामों के आधार पर ओएसएम प्रणाली के भविष्य को लेकर भी निर्णय लिया जा सकता है.
सरकार ने स्वीकार किया है कि ओएसएम प्रणाली में कुछ तकनीकी खामियां मौजूद हैं. इन समस्याओं की जांच और समाधान के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के निदेशकों के नेतृत्व में बनाई गई यह टीम पोर्टल और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी सभी तकनीकी चुनौतियों का अध्ययन करेगी. समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और सुधारात्मक उपायों में भी सहयोग करेगी.
वर्तमान में कैसे मिलती है आंसरशीट?
यदि कोई छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका देखना चाहता है तो उसे अलग से आवेदन करना पड़ता है और निर्धारित शुल्क जमा करना होता है. इसके बाद ही स्कैन कॉपी या वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू होती है.
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों को उनकी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका स्वतः डिजिलॉकर में उपलब्ध हो सकती है. इससे आवेदन प्रक्रिया की आवश्यकता कम होगी और छात्रों को अपने अंकों को लेकर अधिक स्पष्टता मिलेगी.
सूत्रों के अनुसार, सीबीएसई का मानना है कि उत्तर पुस्तिकाओं तक सीधी पहुंच मिलने से मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा और वेरिफिकेशन व पुनर्मूल्यांकन से जुड़े विवादों में कमी आ सकती है.
हालांकि सीबीएसई ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बोर्ड इस मॉडल पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है और इसकी शुरुआत 2027 की बोर्ड परीक्षाओं से हो सकती है. यदि ऐसा होता है तो यह सीबीएसई के परीक्षा परिणाम तंत्र में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा.
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष लगभग 17 लाख छात्रों की 90 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया गया. एक उत्तर पुस्तिका में औसतन 40 पेज होते हैं, जिसके चलते करीब 40 करोड़ पृष्ठों की स्कैनिंग की गई.
शिकायतों के बाद 68 हजार उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा स्कैन किया गया. इसके बावजूद लगभग 13 हजार मामलों में स्कैनिंग संतोषजनक नहीं रही, जिसके बाद उनकी मैन्युअल जांच कराई गई.
सूत्रों ने बताया कि कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के आपस में मिक्स होने की शिकायतें मिलीं. वेदांत नामक छात्र के मामले का उदाहरण देते हुए बताया गया कि 20 छात्रों की कॉपियां आपस में बदल गई थीं.
इन मामलों में पुनर्मूल्यांकन कराया गया. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सिक्योरिटी फीचर्स से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
सीबीएसई ने परिणाम के बाद होने वाली सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए पोस्ट-रिजल्ट गतिविधियों का पोर्टल 1 जून से शुरू करने का निर्णय लिया है.
बोर्ड का कहना है कि यह कदम छात्रों को आवेदन के दौरान तकनीकी समस्याओं से बचाने और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
इस बीच बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की है. कई लोगों का कहना है कि स्कैन की गई प्रतियों में स्पष्टता की कमी देखने को मिली है.
दिल्ली सरकार के स्कूलों में कक्षा 12वीं के अपेक्षाकृत कमजोर परिणाम आने के बाद संबंधित विषय शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है.
नोटिस में कहा गया है कि खराब परिणाम से संस्थान की छवि प्रभावित हुई है. साथ ही शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं लेने, नियमित टेस्ट कराने और कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है.
गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने शिक्षकों को जारी किए गए नोटिसों का विरोध किया है. संगठन ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद को पत्र लिखकर सभी शो-कॉज नोटिस वापस लेने की मांग की है.
संघ का कहना है कि परिणामों में आई गिरावट का प्रमुख कारण ओएसएम प्रणाली की तकनीकी कमियां हैं, न कि शिक्षकों के प्रयासों में कमी.
इसी मुद्दे पर एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, "यह तय प्रक्रिया का हिस्सा है. पहले भी शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगे गए हैं और इसके बाद कई कक्षाओं के नतीजों में सुधार भी देखा गया है. इसे प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय जिम्मेदारी तय करने के रूप में देखा जाना चाहिए."
CBSE बोर्ड परीक्षा परिणामों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत छात्रों को डिजिलॉकर में मार्कशीट और सर्टिफिकेट के साथ उनकी मूल्यांकित आंसरशीट की स्कैन कॉपी भी मिल सकती है. इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और पुनर्मूल्यांकन से जुड़े विवादों को कम करना है.