नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. सोमवार को लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल किया जा सके.
सरकार ने पहले से लागू 2024 के कानून में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए हैं. नए संशोधन के तहत पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. साथ ही ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि दोषियों पर जल्द कार्रवाई हो सके.
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम दस साल तक की सजा हो सकती है. वहीं, यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है तो कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है.
इस विधेयक को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह लोकसभा में पेश करेंगे. संसद में इस पर आठ से दस घंटे तक चर्चा होने की संभावना है. सरकार चाहती है कि सभी दल इस अहम कानून पर अपनी राय रखें और व्यापक सहमति बने.
एनडीए ने इस बहस के लिए अपनी युवा सांसदों की टीम को आगे किया है. बीजेपी की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या बिल के समर्थन में अपनी बात रखेंगे. इसके अलावा जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना, एनसीपी, अपना दल और लोक जनशक्ति पार्टी सहित एनडीए के कई सहयोगी दलों के सांसद भी चर्चा में हिस्सा लेंगे.
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहेंगे. हाल ही में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और मंत्रालय के अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें की है. शिक्षा विभाग से जुड़े सवालों के जवाब भी वे अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ देंगे.
सोमवार को राज्यसभा में 'वंदे मातरम बिल' पर भी चर्चा और पारित कराने की कोशिश की जाएगी. इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान सम्मान देने का प्रावधान करना है. यदि यह बिल पारित होता है तो सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम का अपमान करने पर कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान लागू हो सकता है.
सरकार का मानना है कि एंटी-पेपर लीक कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगेगी और लाखों छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली का भरोसा मिलेगा.