Article 370 के 7 साल: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर निगरानी

अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ पर आज जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. साथ ही संवेदनशील इलाकों में मल्टी-लेयर सुरक्षा की तैनाती है.

Date Updated Last Updated : 05 August 2026, 06:29 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ के मद्देनजर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. संवेदनशील इलाकों और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है. प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है.

हाईवे से लेकर संवेदनशील इलाकों तक निगरानी

सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में आने-जाने वाले वाहनों और लोगों की लगातार जांच कर रही हैं. रामबन में CRPF ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सुरक्षा जांच अभियान चलाया. वहीं, कुलगाम पुलिस ने NH-44 पर वाहनों की चेकिंग के साथ पहचान पत्रों की भी जांच तेज कर दी है. सीमा से सटे क्षेत्रों में भी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक, संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है.

प्रदर्शन की अनुमति नहीं

प्रशासन ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन या रैलियों की अनुमति नहीं दी है. सुरक्षा एजेंसियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित व्यवधान को रोकने के निर्देश दिए गए हैं. प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है.

2019 में हटाया गया था अनुच्छेद 370

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर दिया था. इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया.

उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश किया था. सरकार ने इसे जम्मू-कश्मीर के विकास और देश के साथ पूर्ण एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया था.

विकास और राज्य का दर्जा चर्चा में

बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और विकास गतिविधियों में बढ़ोतरी का दावा किया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लोगों का भरोसा बढ़ा है और कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है.

वहीं शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने जम्मू-कश्मीर को जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की. उनका कहना है कि राज्य का दर्जा मिलने से क्षेत्र में विकास की गति और तेज हो सकती है. सातवीं वर्षगांठ के मौके पर सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन का मुख्य फोकस शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है.

सम्बंधित खबर

Recent News