ईरान युद्ध ने मचाई तबाही, भारत ने ढाका को भेजी 5000 टन डीजल की 'लाइफलाइन'

ढाका में ईंधन संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए डीजल की एक बड़ी खेप ढाका भेजी है. भारत ने द्विपक्षीय ऊर्जा समझौते के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल भेजा है.

Date Updated Last Updated : 11 March 2026, 07:56 AM IST
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Courtesy: Pinterest

ढाका: ढाका में ईंधन संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश की मदद के लिए डीजल की एक बड़ी खेप भेजी है. ईरान से जुड़े युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आई है, जिसका असर दक्षिण एशिया तक महसूस किया जा रहा है. ऐसे समय में भारत की ओर से भेजी गई डीजल आपूर्ति ने बांग्लादेश को कुछ राहत दी है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को भी मजबूत किया है.

भारत ने भेजे 5000 टन डीजल 

सूत्रों के अनुसार, भारत ने नियमित द्विपक्षीय ऊर्जा समझौते के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल भेजा है. बांग्लादेश इस समय पेट्रोल और डीजल की कमी से जूझ रहा है, इसलिए उसने भारत से अतिरिक्त आपूर्ति की भी मांग की है. बांग्लादेश पेट्रोलियम निगम (बीपीसी) के अध्यक्ष मोहम्मद रेजानुर रहमान ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार भारत पाइपलाइन के माध्यम से हर साल 1,80,000 टन डीजल की आपूर्ति करता है.

भारत-बांग्लादेश ऊर्जा समझौता

भारत और बांग्लादेश के बीच ऊर्जा सहयोग कई वर्षों से जारी है. दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार, भारत हर साल बांग्लादेश को 1,80,000 टन डीजल उपलब्ध कराता है. इस व्यवस्था के तहत छह महीनों की अवधि में कम से कम 90,000 टन डीजल बांग्लादेश को मिलना तय है. वर्तमान में भेजी गई 5,000 टन की खेप इसी समझौते का हिस्सा है. बांग्लादेश को उम्मीद है कि अगले दो महीनों में छह महीने की आवश्यकता के अनुसार शेष डीजल भी आयात कर लिया जाएगा.

मैत्री पाइपलाइन के जरिए हो रही आपूर्ति

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह डीजल आपूर्ति 2017 में शुरू की गई ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ परियोजना के तहत की जा रही है. इस पाइपलाइन के माध्यम से असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से व्यावसायिक आधार पर बांग्लादेश को ईंधन भेजा जाता है. इस परियोजना का उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना और ईंधन परिवहन को अधिक सुगम बनाना है.

बांग्लादेश में गहराता ऊर्जा संकट

ईंधन की कमी के कारण बांग्लादेश को कई सख्त कदम उठाने पड़े हैं. हाल ही में सरकार ने पेट्रोल पंपों पर ईंधन बिक्री की दैनिक सीमा तय कर दी है, क्योंकि कई जगहों पर भारी भीड़ और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी. इसके अलावा ऊर्जा बचत के उद्देश्य से सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों को भी अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है.

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