नई दिल्ली: ईरानी अर्थव्यवस्था इस समय अपने इतिहास के सबसे अंधकारमय दौर से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बढ़ते तनाव, महीनों से जारी युद्ध और भीषण महंगाई के तिहरे प्रहार ने देश की आर्थिक कमर तोड़ दी है। इसी बीच खबर है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा 'रियाल' निचले स्तर पर पहुंच गई है। वॉशिंगटन की ओर से नई और बेहद सख्त आर्थिक पाबंदियों की घोषणा की आहट मात्र से ही ईरानी मुद्रा बाजार में हड़कंप मच गया है।
अनौपचारिक बाजार में भारी तबाही
ईरान के इनफॉर्मल मनी मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही रियाल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 20.2 लाख रियाल के स्तर पर पहुंच गई।
ईरान के सेंट्रल बैंक ने आधिकारिक विनिमय दर करीब 15 लाख रियाल प्रति डॉलर तय कर रखी है। आम जनता से लेकर व्यापारी तक सभी अनौपचारिक बाजार की दरों पर ही व्यापार करने को मजबूर हैं।
'इकोनॉमिक डी-डे' की तैयारी में वॉशिंगटन
रियाल की इस रिकॉर्ड तोड़ गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा तैयार की जा रही 'इकोनॉमिक डी-डे' नाम की नई आर्थिक पाबंदियां हैं। वॉशिंगटन का स्पष्ट कहना है कि ये कदम ईरान पर पहले से जारी नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंधों के दबाव को कई गुना बढ़ा देंगे।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह नई रूपरेखा उन तीसरे देशों पर भी सेकेंडरी प्रतिबंध लगाएगी जो अभी भी ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन सख्त फैसलों से ईरानी शासन को समझौते की मेज पर लाने के लिए विवश किया जा सकेगा।
युद्ध और दोहरे अंकों की महंगाई की मार
गौरतलब है कि ईरानी अर्थव्यवस्था की हालत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों से पहले भी बहुत अच्छी नहीं थी। देश लंबे समय से दोहरे अंकों वाली महंगाई और नकारात्मक विकास दर का सामना कर रहा था। लेकिन बीते छह महीनों से जारी युद्ध ने स्थिति को अत्यंत विकट बना दिया है। रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और आम नागरिकों के लिए जीवनयापन करना बेहद दुष्कर होता जा रहा है।
होर्मुज जलमार्ग पर जंग
अमेरिकी दबाव और चौतरफा नाकेबंदी के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से मनचाही रियायतें हासिल करने में फिलहाल पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं। ईरान अब भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है। युद्ध से पहले वैश्विक तेल व्यापार का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता था, जो अब ईरानी धमकियों और हमलों के कारण बुरी तरह बाधित है। तनाव को कम करने के इरादे से ईरान और ओमान फारस की खाड़ी में जहाजों के प्रवेश और निकास के लिए एक संयुक्त प्रबंधन प्रणाली बनाने पर अंतिम दौर की चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, ओमान की इस मध्यस्थता से नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओमान को भी कड़ी चेतावनी दे डाली है।