नई दिल्ली: गोलन हाइट्स को लेकर अमेरिका के एक बयान ने अचानक इजरायल और अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी. अमेरिकी राजदूत टॉम बराक ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि इजरायल अब भी गोलान हाइट्स पर कब्जा किए हुए है. उनका यह बयान इसलिए विवादों में आ गया, क्योंकि 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दे दी थी. मामला बढ़ने पर बराक को बाद में सफाई देनी पड़ी और उन्होंने कहा कि अमेरिका की आधिकारिक नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
टॉम बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए एक इंटरव्यू में गोलान हाइट्स का मुद्दा उठाया था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि इजरायल इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है. बयान सामने आने के बाद इसे अमेरिकी रुख में बदलाव के तौर पर देखा जाने लगा.
गोलन हाइट्स सीरिया का एक बेहद अहम और रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है. 1967 के युद्ध के दौरान इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद 1981 में इजरायल ने गोलान हाइट्स को अपने क्षेत्र में शामिल करने का फैसला किया. संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के ज्यादातर देश आज भी इजरायल के इस कदम को मान्यता नहीं देते हैं. हालांकि, अमेरिका का रुख इससे अलग रहा है. 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने गोलान हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता देकर अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव किया था.
बयान पर अमेरिका और इजरायल में सवाल उठने लगे तो रविवार को टॉम बराक ने अपनी बात स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि उनके बयान का मकसद संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने साफ किया कि ट्रंप प्रशासन ने 2019 में गोलान हाइट्स को लेकर जो नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. बराक के मुताबिक, उन्होंने गोलान हाइट्स का उदाहरण दक्षिणी लेबनान की मौजूदा स्थिति को समझाने के लिए दिया था. उनका कहना था कि बातचीत और आपसी सहमति से बने समझौते सिर्फ नक्शे में बदलाव करने की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक टिक सकते हैं.
बराक के बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह टिप्पणी ट्रंप के पुराने फैसले से अलग नजर आती है. वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी इसका विरोध करते हुए इसे अमेरिकी नीति के विपरीत बताया.
इसी इंटरव्यू में टॉम बराक ने सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायली हमले की आलोचना की थी. इसके अलावा हिजबुल्लाह और ईरान का जिक्र करने के बाद भी विवाद खड़ा हुआ. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बातचीत नहीं करता और उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया.