Sawan Last Somwar 2026: शाम को करें भोलेनाथ की पूजा, प्रदोष काल में मिलेगा विशेष फल

सावन का अंतिम सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं. जलाभिषेक और पूजा का पूरा लाभ पाने के लिए सही मुहूर्त और विधि जानना बेहद जरूरी है.

Date Updated Last Updated : 24 August 2026, 11:12 AM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: सावन का अंतिम सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से परेशानियां कम होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है. अगर आप भी आज शिवलिंग का जलाभिषेक करने जा रहे हैं, तो पूजा के शुभ समय और सही विधि को जानना जरूरी है.

जलाभिषेक और पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:10 बजे तक

सुबह की पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 6 बजे से 9:15 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12:50 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक

आखिरी सावन सोमवार पर बन रहे शुभ योग

सावन के अंतिम सोमवार पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है. इस दिन प्रीति योग और आयुष्मान योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा. इसके अलावा शाम के समय प्रदोष काल का संयोग बनना भी पूजा के लिए विशेष माना जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसे शुभ समय में की गई शिव पूजा और जलाभिषेक का विशेष फल मिलता है.

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही विधि

जलाभिषेक के लिए तांबे या चांदी के पात्र में साफ पानी या गंगाजल लें. उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित करें. सबसे पहले जलाधारी के बाएं हिस्से पर, जहां भगवान गणेश का स्थान माना जाता है, जल चढ़ाएं. इसके बाद दाएं हिस्से पर भगवान कार्तिकेय को जल अर्पित करें. फिर जलाधारी के बीच वाले हिस्से और गोल भाग पर जल चढ़ाएं. अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल की पतली धारा चढ़ाएं.

सरल पूजन विधि

सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और व्रत या पूजा का संकल्प लें. इसके बाद शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर शामिल होते हैं. फिर साफ पानी से शिवलिंग का अभिषेक करें. इसके बाद भोलेनाथ को सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते और आंकड़े के फूल अर्पित करें. 

अंत में शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें. फल, मिठाई या खीर का भोग लगाकर धूप-दीप से आरती करें और पूजा में हुई भूल के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगें.

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