दुनियाभर में सोने की कीमतों में तेजी का असर अब भारत में भी साफ नजर आने लगा है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की कुल अनुमानित वैल्यू जनवरी 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गई है. रुपये में इसकी कीमत करीब 445 लाख करोड़ आंकी गई है, जो देश के शेयर बाजार Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण के लगभग बराबर है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवारों में सोने की ओर झुकाव तेजी से बढ़ा है. लोग पारंपरिक वित्तीय निवेश जैसे बैंक डिपॉजिट से हटकर अब सोने जैसे भौतिक संपत्ति में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं. यह बदलाव संकेत देता है कि बचत का एक बड़ा हिस्सा अब वित्तीय प्रणाली से बाहर जा रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार, घर और जमीन को छोड़कर भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति में सोने की हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इतना ही नहीं, यह बैंक जमा और इक्विटी निवेश की कुल वैल्यू से भी काफी ज्यादा है, जिससे सोने की बढ़ती अहमियत साफ दिखाई देती है.
पिछले पांच वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. मार्च 2019 में जहां कुल वैल्यू करीब 109 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 445 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. इस तेज बढ़ोतरी के पीछे बढ़ता आयात और वैश्विक बाजार में सोने की मांग अहम कारण माने जा रहे हैं.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर सोने की मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. ज्यादा आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा और बाहरी भुगतान संतुलन भी प्रभावित हो सकता है. Reserve Bank of India के भंडार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. सोने में बढ़ता निवेश जहां परिवारों के लिए सुरक्षित विकल्प बन रहा है. वहीं, यह अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है.
सोने में बढ़ते निवेश को जहां आम लोग सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं. वहीं, अर्थशास्त्रियों के लिए यह चिंता का विषय बनता जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि जब लोग अपनी बचत को बैंक जमा या अन्य वित्तीय साधनों की बजाय सोने में लगाते हैं, तो वह पूंजी सक्रिय अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाती.