देहरादून: उत्तराखंड में एक साल पहले लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को अब अच्छा समर्थन मिल रहा है. खासकर विवाह पंजीकरण के मामले में यह कानून काफी सफल साबित हुआ है. बीते एक साल में राज्य में लगभग पांच लाख शादियों का पंजीकरण हो चुका है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक कुल 4,74,447 विवाह यूसीसी के तहत पंजीकृत किए गए हैं. यह संख्या दिखाती है कि लोग इस नए कानून को तेजी से अपना रहे हैं.
विवाह पंजीकरण की बड़ी संख्या का मुख्य कारण इसकी ऑनलाइन व्यवस्था को माना जा रहा है. अब शादीशुदा जोड़ों को उप-पंजीयक कार्यालय में जाकर मौजूद रहने की जरूरत नहीं है. दंपत्ति और गवाह घर बैठे ही जरूरी दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और वीडियो के जरिए अपना बयान दर्ज कर सकते हैं. इससे समय की बचत हुई है और प्रक्रिया भी काफी आसान हो गई है.
पहले व्यवस्था में रोजाना औसतन केवल 60 से 70 विवाह पंजीकरण होते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 1,400 प्रतिदिन तक पहुंच गई है.
27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां समान नागरिक संहिता लागू की गई. इस कानून का मकसद विवाह, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार से जुड़े नियमों को एक समान बनाना है.
यूसीसी के लागू होने के एक साल पूरे होने की तैयारी के बीच यह साफ दिख रहा है कि इस कानून से महिला सशक्तिकरण, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और नागरिकों के बीच समानता को मजबूती मिली है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी की सफलता पर राज्य के लोगों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने इस कानून को लागू करके देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण पेश किया है.
मुख्यमंत्री के अनुसार, कानून को सरल और पारदर्शी तरीके से लागू किए जाने की वजह से लोगों का भरोसा बढ़ा है और इसी कारण बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण करा रहे हैं.
इस अवधि में 316 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से तलाक प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं. वहीं 68 लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण कराया है और दो लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाण पत्र लिया है. सरकार ने विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 15 दिनों की समय सीमा भी तय की है, जिससे लोगों को समय पर दस्तावेज़ मिल सकें.