लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश, दीवार ढहने और आकाशीय बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. बिगड़ते हालातों के मद्देनजर भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आज, 10 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है. मौसम वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताते हुए स्थानीय प्रशासन और आम जनता को सुरक्षित स्थानों पर रहने की कड़ी हिदायत दी है.
लगातार हो रही इस बारिश ने राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचाई है. राजधानी लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में भीषण जलभराव के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
संत कबीर नगर की मेहदावल तहसील के अंदर आने वाले दो अलग-अलग गांवों में खेतों में काम करते समय बिजली गिरने से 17 वर्षीय चांदनी और 60 वर्षीय वरसाना की मौके पर ही मौत हो गई. स्थानीय प्रशासन ने इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवारों को आपदा कोष से सरकारी आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कुशीनगर के थड़िभार गांव में एक और दर्दनाक हादसा हुआ, जहां खेत की मेड़ पर खड़े 14 वर्षीय किशोर राहुल कुमार पर आकाशीय बिजली गिर गई. वज्रपात इतना जोरदार था कि राहुल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.
शहरी बुनियादी ढांचे की पोल खोलती एक घटना गाजियाबाद के विजय नगर क्षेत्र की सर्वोदय कॉलोनी में सामने आई. यहां उफान पर चल रहे और पानी से लबालब भरे एक खुले नाले में गिरने से तीन साल की मासूम बच्ची पल्लवी की मौत हो गई. इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में नगर निगम के खिलाफ भारी रोष है. प्रशासन ने मृतका के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा राशि देने का ऐलान किया है. आईएमडी ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है.