चंडीगढ़: पंजाब को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए राज्यव्यापी अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ ने अपने 500 दिन पूरे कर लिए हैं. 1 मार्च 2025 को शुरू हुए इस व्यापक अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने सख्त कानूनी कार्रवाई, खुफिया तंत्र और जनसहभागिता के त्रिवेणी मॉडल को अपनाते हुए नशा तस्करी के संगठित गिरोहों के नेटवर्क को बुरी तरह ध्वस्त कर दिया है.
रिकॉर्ड 52,432 FIR
पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने बताया कि बीते 500 दिनों में राज्य पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम के तहत 52,432 एफआईआर दर्ज की हैं. इस कार्रवाई के दौरान 68,850 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा गया.
बड़े तस्करों पर नकेल: गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 629 बड़े तस्कर शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास से 2 किलोग्राम या उससे अधिक मात्रा में हेरोइन बरामद की गई.
बरामदगी का मूल्य: इन बड़े मामलों में बरामद हेरोइन की कुल अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग 12 करोड़ रुपये है.
319 करोड़ की अवैध संपत्तियां जब्त
नशा माफिया के वित्तीय तंत्र को पूरी तरह तोड़ने के लिए पुलिस ने उनकी अवैध कमाई से हासिल संपत्तियों पर कड़ा प्रहार किया है. एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रमुख एडीजीपी नीलाभ किशोर के अनुसार तस्करों की 319 करोड़ मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया. नशे के कारोबार से अर्जित धन से सरकारी जमीनों पर बनाए गए अवैध ढांचो को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया.
'सेफ़ पंजाब' हेल्पलाइन बनी जनसहभागिता की पहचान
इस अभियान को आम जनता का अभूतपूर्व समर्थन मिला है. पुलिस द्वारा जारी की गई ‘सेफ पंजाब एंटी-ड्रग हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर नागरिकों ने निर्भय होकर सहयोग किया. हेल्पलाइन पर कुल 46,342 गुमनाम सूचनाएं प्राप्त हुईं. इन सूचनाओं के सटीक विश्लेषण पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 22,960 नशा तस्करों को रंगे हाथों गिरफ़्तार किया.
देश में सर्वाधिक 89% सजा दर
जांच की उच्च गुणवत्ता और साक्ष्यों के सही प्रस्तुतीकरण के बल पर पंजाब पुलिस ने एनडीपीएस मामलों में 89% दोषसिद्धि दर हासिल की है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है. दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए का उपयोग करते हुए 10,917 व्यक्तियों को कानूनी सजा के स्थान पर नशामुक्ति उपचार और रिहैबिलिटेशन सेंटर का लाभ उठाने का अवसर दिया गया, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें.
ग्राम रक्षा समितियों से सुदृढ़ हुआ खुफिया तंत्र
ज़मीनी स्तर पर सूचनाएं जुटाने और गावों को नशे से बचाने के लिए 24,000 से अधिक ग्राम रक्षा समितियों (VDCs) का गठन किया गया है. इन समितियों के 1.25 लाख से अधिक सदस्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस तक पहुंचा रहे हैं. इसके साथ ही, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए राज्य भर में खेल प्रतियोगिताओं, जनसंवाद और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जा रहा है.