पंजाब पुलिस का बड़ा प्रहार, 1.09 लाख से ज्यादा छापे और 1532 भगौड़े गिरफ्तार

पंजाब को संगठित अपराध, गैंगस्टर संस्कृति और नशा मुक्त बनाने के संकल्प के साथ शुरू किया गया पुलिस का विशेष अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ सफलता के 200 दिन पूरे कर चुका है।

Date Updated Last Updated : 08 August 2026, 01:03 PM IST
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मोहाली: पंजाब को संगठित अपराध, गैंगस्टर संस्कृति और नशा मुक्त बनाने के संकल्प के साथ शुरू किया गया पुलिस का विशेष अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ सफलता के 200 दिन पूरे कर चुका है। राज्य सरकार की दृढ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री भगवंत मान के दिशानिर्देशों पर आधारित यह मुहिम अब केवल अपराधियों की धरपकड़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने अपराधियों के पूरे आर्थिक तंत्र, संचार माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। इस 200 दिवसीय व्यापक और खुफिया-आधारित अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में एक लाख नौ हजार से अधिक स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन कार्रवाइयों के जरिए जहां हजारों अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया, वहीं भारी मात्रा में अवैध हथियार, विस्फोटक और करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ जब्त कर संगठित अपराध के पूरे ढांचे को छिन्न-भिन्न कर दिया गया।

संगठित अपराध की टूटी कमर

इस विशेष अभियान की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने बीते 200 दिनों के भीतर 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को दबोचने में सफलता पाई है। इसके साथ ही 58,212 से अधिक अपराधियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई। कुल मिलाकर इस अवधि में 1,04,927 संदिग्धों की जांच की गई, जिनमें 2,959 सक्रिय गैंगस्टर एवं उनके मददगार तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल रहे। निवारक पुलिसिंग को प्राथमिकता देते हुए 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जबकि विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया के बाद 18,514 निर्दोष लोगों को रिहा भी किया गया। यह डेटा दर्शाता है कि पुलिस केवल कार्रवाई का आंकड़ा नहीं बढ़ा रही, बल्कि पूरी पारदर्शिता और जांच-परख के साथ अभियानों को अंजाम दे रही है।

डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने इस मील के पत्थर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान की सफलता निरंतर और खुफिया-आधारित पुलिसिंग की रणनीति का परिणाम है। पंजाब पुलिस का लक्ष्य महज गिरफ्तारियां करना नहीं, बल्कि गैंगस्टरों को सहयोग देने वाले पूरे रसद ढांचे, उनके स्थानीय नेटवर्क, वित्तीय स्रोतों और विदेशों में बैठे आकाओं को पूरी तरह ध्वस्त करना है। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि अपराध का रास्ता चुनने वालों के लिए देश के भीतर या सीमाओं के पार कोई भी ठिकाना सुरक्षित न रहे।

हथियारों की मारक क्षमता पर बड़ा प्रहार

संगठित आपराधिक गिरोहों की सबसे बड़ी ताकत उनकी आक्रामक मारक क्षमता और अवैध हथियार होते हैं। पंजाब पुलिस ने इस नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाकर हथियारों की विशाल खेप बरामद की है। इन 200 दिनों के भीतर राज्यभर से 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगजीन, 2.5 किलोग्राम उच्च तीव्रता वाला विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड जब्त किए गए। 

नशे और वित्तीय नेटवर्क की कमर तोड़ी

नशा तस्करी और संगठित अपराध के बीच के खतरनाक गठजोड़ को खत्म करने के लिए एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) और जिला पुलिस ने समानांतर कार्रवाई की। इस दौरान 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी और लगभग 26.91 लाख नशीली गोलियां जब्त की गईं। इसके अलावा, अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 64,402 लीटर से अधिक शराब, 34,840 बोतलें और 926 पेटियां नष्ट की गईं।

अपराध के वित्तीय आधार को सुखाने के लिए पुलिस ने 1.73 करोड़ रुपये की ड्रग मनी, 1.80 करोड़ रुपये नकद और 413.85 ग्राम सोना जब्त किया। साथ ही, अपराधियों द्वारा संचार और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और सीमा पार से तस्करी में प्रयुक्त 61 ड्रोन भी कब्जे में लिए गए। वित्तीय स्रोतों को बंद करने की इस आक्रामक नीति ने गिरोहों के पास फंड की उपलब्धता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।

डिजिटल इंटेलिजेंस

एजीटीएफ के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस प्रमोद बान ने स्पष्ट किया कि आधुनिक समय में संगठित अपराध का संचालन डिजिटल संचार, अवैध फंडिंग और विदेशी धरती से हो रहा है। इसी के मद्देनजर पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों, पड़ोसी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठनों के साथ तालमेल बिठाकर अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। डिजिटल ट्रैकिंग का ही परिणाम है कि फिरोजपुर के फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा को मध्य एशिया से और गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत डिपोर्ट कराया गया।

सरहद पार की कार्रवाइयां

यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय कानून व्यवस्था से भागकर विदेशों में शरण लेने वाले गैंगस्टरों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही, यह कार्रवाई राज्य के उन युवाओं के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो भ्रमवश गैंगस्टर संस्कृति के प्रति आकर्षित होते हैं। पुलिस लगातार यह जागरूकता फैला रही है कि अपराध के ग्लैमर का अंत केवल तबाही और सलाखों के पीछे होता है।

इनाम नीति की शुरुआत

जनता के सहयोग को इस अभियान की मुख्य शक्ति बनाने के लिए एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने एक समर्पित टिपलाइन '93946-93946' की शुरुआत की है। इस नंबर के माध्यम से राज्य का कोई भी नागरिक वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों, वसूली गिरोहों या किसी भी संदिग्ध आपराधिक गतिविधि की सूचना सीधे पुलिस को दे सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा ताकि नागरिक बिना किसी डर के पुलिस का सहयोग कर सकें।

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