महिला आरक्षण पर AAP का साफ स्टैंड, सांसद मलविंदर कंग ने संसद में उठाई आवाज; परिसीमन को लेकर केंद्र पर गंभीर आरोप

AAP सांसद ने संसद में महिला आरक्षण का समर्थन किया। साथ ही परिसीमन पर केंद्र को घेरा। छोटे राज्यों के अधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है.

Date Updated Last Updated : 16 April 2026, 08:33 PM IST
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संसद में महिला आरक्षण को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया. सांसद मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का पूरा समर्थन करती है. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 2023 में पास हुए कानून को तुरंत लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि अब और देरी नहीं होनी चाहिए. महिलाओं को उनका हक मिलना जरूरी है.

कंग ने अपने भाषण में सिख गुरुओं की शिक्षाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सिख परंपरा में हमेशा महिलाओं को सम्मान दिया गया है. उन्होंने याद दिलाया कि जब सती प्रथा जैसी कुरीतियां थीं, तब गुरुओं ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबरी देना हमारी संस्कृति का हिस्सा है.

क्या महिलाओं के अधिकारों पर दी मिसाल?

कंग ने कहा कि कई विकसित देशों में महिलाओं को देर से वोट का अधिकार मिला. लेकिन सिख संस्थाओं ने बहुत पहले यह अधिकार दे दिया था. उन्होंने बताया कि 1920 में ही महिलाओं को वोट देने का हक मिल गया था. इससे यह साफ होता है कि बराबरी का विचार नया नहीं है.

क्या परिसीमन पर केंद्र को घेरा गया?

महिला आरक्षण के साथ-साथ कंग ने परिसीमन के मुद्दे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छोटे राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर रही है. खासकर पंजाब जैसे राज्यों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने इसे एक साजिश बताया.

क्या पंजाब की भूमिका का जिक्र हुआ?

कंग ने कहा कि पंजाब ने देश के लिए बड़ा योगदान दिया है. आजादी की लड़ाई में सबसे ज्यादा बलिदान दिए गए. इसके बावजूद पंजाब को राजनीतिक रूप से कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राजधानी चंडीगढ़ भी पंजाब को नहीं मिली. अब प्रतिनिधित्व भी घटाया जा रहा है. कंग ने कहा कि केंद्र ने पहले जनसंख्या नियंत्रण की अपील की थी. पंजाब ने इसे गंभीरता से अपनाया. अब उसी का नुकसान राज्य को उठाना पड़ रहा है. कम आबादी के आधार पर सीटें घटाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि यह सही तरीका नहीं है.

आगे क्या होगा सियासी असर?

इस बयान के बाद सियासत में नई बहस शुरू हो गई है. एक तरफ महिला आरक्षण पर समर्थन है. दूसरी तरफ परिसीमन को लेकर विरोध बढ़ रहा है. कंग ने साफ कहा कि आरक्षण लागू होना चाहिए, लेकिन राज्यों के अधिकारों से समझौता नहीं होना चाहिए. आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है.

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