बांकीपुर उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर को बड़ा झटका, जन सुराज के कई नेता BJP में शामिल

बांकीपुर उपचुनाव से पहले बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. जन सुराज पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने जन सुराज का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है.

Date Updated Last Updated : 15 July 2026, 04:04 PM IST
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Courtesy: X/@ImHydro45

पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए चुनावी माहौल के बीच मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं. पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने जन सुराज का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है. 

बुधवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह के दौरान जन सुराज पार्टी के कई नेताओं ने आधिकारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में नए सदस्यों का स्वागत किया गया. बीजेपी में शामिल होने वालों में केसी सिन्हा, गोपाल सिंह और बिट्टू सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं. इनके साथ बड़ी संख्या में जन सुराज के समर्थक और कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा की सदस्यता ली.

2025 विधानसभा चुनाव में रहे थे उम्मीदवार

केसी सिन्हा वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज की ओर से कुम्हरार विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए थे. वहीं गोपाल सिंह ने मनेर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. इसके अलावा बिट्टू सिंह को दीघा विधानसभा सीट से टिकट मिला था. हालांकि विधानसभा चुनाव में तीनों नेताओं को जीत नहीं मिल सकी थी, लेकिन वे पार्टी के सक्रिय चेहरों में गिने जाते थे.

पहले ही दे चुके थे संकेत

बिट्टू सिंह ने कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक रूप से यह संकेत दे दिया था कि वह जन सुराज से अलग होने जा रहे हैं. उन्होंने एक पत्र जारी कर पार्टी छोड़ने का फैसला बताया था. उन्होंने यह भी कहा था कि बांकीपुर उपचुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे. उनके इस बयान के बाद से ही उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है.

प्रशांत किशोर के चुनाव के बीच बढ़ी चुनौती

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं. चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के कई प्रमुख नेताओं का साथ छोड़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव मतदान और चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा.

जन सुराज की ओर से नहीं आया कोई बयान

इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. हालांकि खबर लिखे जाने तक जन सुराज पार्टी की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले नेताओं का पार्टी बदलना किसी भी दल के लिए चुनौती पैदा कर सकता है. वहीं यह भी देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर उपचुनाव में इसका कितना असर पड़ता है और मतदाता इस बदलाव को किस नजरिए से देखते हैं.

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