नई दिल्ली: भारतीय टीम सफेद गेंद प्रारूप में बेहद शानदार प्रदर्शन कर रही है. टीम मौजूदा समय में वाइट गेंद की सरताज है. लेकिन टीम का प्रदर्शन लाल गेंद में पिछले कुछ समय से विचारनीय है. भारत की टेस्ट टीम मौजूदा समय में ट्रांजिशन फॉर्म से गुजर रही है.
लेकिन भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा मोड़ तब आया जब अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अचानक संन्यास ले लिया था. उन्होंने यह फैसला लेकर सभी को चौका दिया था. उनके इस फैसले ने न सिर्फ फैंस बल्कि क्रिकेट विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर इतने अहम दौर में उन्होंने यह कदम क्यों उठाया. अब उन्होंने इस बारे में खुलकर बात की है.
जब अश्विन अचानक संन्यास का ऐलान किया था तब ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि शायद उन्होंने किसी के दबाव में आकर यह फैसला लिया था. लेकिन अब अश्विन ने एक कार्यक्रम के दौरान इस बारे में बात करते हुए कहा कि फैसले सही या गलत हो सकते हैं, लेकिन वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहते हैं.
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि टीम संयोजन में बदलाव और लगातार अंदर-बाहर होने की स्थिति ने उन्हें यह महसूस कराया गया कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिसंबर 2024 में भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज के बीच ब्रिस्बेन टेस्ट के बाद अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. उन्होंने इस सीरीज में केवल एडिलेड टेस्ट खेला था, जबकि ब्रिस्बेन में उनकी जगह रवींद्र जडेजा को मौका मिला था. अश्विन ने अपने करियर का अंत 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट के साथ किया. इसके साथ ही वह भारत के लिए दूसरे सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज थे.
अश्विन के रिटायरमेंट के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या उन्होंने जल्दबाजी में फैसला लिया. कई लोगों का मानना था कि अगर वह कुछ समय और खेलते, तो कुंबले का रिकॉर्ड तोड़ सकते थे. लेकिन अश्विन ने साफ किया कि उनके लिए व्यक्तिगत संतुष्टि ज्यादा मायने रखती है.