महिलाओं का फूटा गुस्सा, टीएमसी नेता पर बरसाए सड़े अंडे, जानें क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के गोपालपुर इलाके में पंचायत स्तर पर चल रहे प्रशासनिक गतिरोध और कथित भेदभाव से नाराज ग्रामीण महिलाओं ने टीएमसी की स्थानीय पंचायत प्रमुख गीता बर्मन के घर का घेराव कर दिया.

Date Updated Last Updated : 04 June 2026, 11:17 AM IST
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Courtesy: X @suryakantvsnl

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले से सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ स्थानीय लोगों के भारी गुस्से की एक बड़ी खबर सामने आई है. जिले के गोपालपुर इलाके में पंचायत स्तर पर चल रहे प्रशासनिक गतिरोध और कथित भेदभाव से नाराज ग्रामीण महिलाओं ने टीएमसी की स्थानीय पंचायत प्रमुख गीता बर्मन के घर का घेराव कर दिया.

सड़े अंडे से किया वार

यह विरोध प्रदर्शन देखते ही देखते बेहद उग्र हो गया. जिसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पंचायत प्रमुख के आवास पर सड़े अंडे और पानी की बोतलें बरसा दीं. घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है.

ठप सेवाओं को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

इस हिंसक प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में बड़े पैमाने पर की गई कथित गड़बड़ी बताई जा रही है. गोपालपुर के स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के बाद से पंचायत प्रमुख क्षेत्र से पूरी तरह से गायब रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर मिलने वाली बुनियादी सेवाएं पिछले कई महीनों से पूरी तरह ठप पड़ी हैं. सबसे गंभीर आरोप मनरेगा  से जुड़ा हुआ है.

जॉब कार्ड की सूची हटाया नाम

स्थानीय महिलाओं का दावा है कि राजनीतिक दुर्भावना या लापरवाही के चलते जॉब कार्ड की आधिकारिक सूची से कई गरीब ग्रामीणों के नाम जानबूझकर हटा दिए गए हैं. जॉब कार्ड कटने की वजह से ग्रामीणों के सामने रोजगार और आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. जिसने इस जनाक्रोश को भड़काने में बारूद का काम किया.

लगाया जानलेवा हमले का आरोप

जिस समय महिलाओं की भारी भीड़ ने घर को घेरा उस वक्त टीएमसी पंचायत प्रमुख गीता बर्मन और उनके पति मकान के भीतर ही मौजूद थे. उग्र भीड़ ने नारेबाजी की. घर में तोड़फोड़ करने की कोशिश भी की। गीता बर्मन ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

जानलेवा हमला किया

उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि वह किसी राजनीतिक कारण से नहीं बल्कि पिछले काफी समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, जिसकी वजह से वह क्षेत्र का दौरा नहीं कर पाई. उन्होंने इस घटना को सामान्य विरोध मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि यह उनके ऊपर एक सुनियोजित और जानलेवा हमला था.

इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

घटना की सूचना मिलते ही कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने के लिए मेखलीगंज थाना पुलिस की एक बड़ी टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने बमुश्किल स्थिति को नियंत्रित किया और पंचायत प्रमुख के घर के बाहर सुरक्षा घेरा तैयार किया. फिलहाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है.

करना पड़ा विरोध प्रदर्शन का सामना

बता दे कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम जनता और विपक्ष का यह कोई पहला तीखा विरोध नहीं है. हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को भी भारी विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था, जहां उनके काफिले को रोकने की कोशिश के बाद उन्हें हेलमेट पहनकर सुरक्षित निकलना पड़ा था. कूचबिहार की इस घटना ने एक बार फिर राज्य में जमीनी स्तर पर पनप रहे राजनीतिक और प्रशासनिक असंतोष को उजागर कर दिया है.

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