नई दिल्ली: सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है. हालांकि पिछले महीने हुई लगातार बढ़ोतरी के बाद आम लोगों पर महंगे ईंधन का दबाव अभी भी बना हुआ है. कई बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से अधिक बनी हुई है, जिससे लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है. जून महीने में अब तक तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की है. इससे पहले मई में चार अलग-अलग मौकों पर दाम बढ़ाए गए थे. इन बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ था.
नई दिल्ली- 102.12 रुपये प्रति लीटर
हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल की कीमत 115 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बनी हुई है. वहीं जयपुर, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी पेट्रोल 110 रुपये से अधिक की दर पर बिक रहा है.
नई दिल्ली- 95.20 रुपये प्रति लीटर
कोलकाता- 99.82 रुपये प्रति लीटर
मुंबई- 97.83 रुपये प्रति लीटर
चेन्नई- 99.65 रुपये प्रति लीटर
गुरुग्राम- 95.30 रुपये प्रति लीटर
नोएडा- 95.44 रुपये प्रति लीटर
बेंगलुरु- 98.80 रुपये प्रति लीटर
भुवनेश्वर- 100.68 रुपये प्रति लीटर
चंडीगढ़- 89.47 रुपये प्रति लीटर
हैदराबाद- 103.82 रुपये प्रति लीटर
जयपुर- 97.78 रुपये प्रति लीटर
लखनऊ- 95.36 रुपये प्रति लीटर
पटना- 100.20 रुपये प्रति लीटर
तिरुवनंतपुरम- 104.40 रुपये प्रति लीटर
तेल कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार संशोधन किया था. उस समय पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद से दाम स्थिर बने हुए हैं.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है. ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं. हालांकि अब बाजार में थोड़ी राहत दिख रही है. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में 21 सेंट की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 95.24 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है.
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत देने वाली है, लेकिन वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंताएं अभी खत्म नहीं हुई हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं का असर तेल बाजार पर बना हुआ है. भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.