Indian Currency Value: 100 साल पहले क्या थी पैसों की हालत? जानिए कितना गिर चुका है रुपया

आज के समय में जीवन यापन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है पैसा. हर देश में इसकी कीमत अलग-अलग होती है. जिस देश की करेंसी सबसे ज्यादा होती है, वह सबसे विकसित देश होता है. अगर भारतीय रुपए की बात करें तो पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार गिरावट आ रही है.

Date Updated Last Updated : 14 January 2025, 12:31 PM IST
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Rupee At Record Low: आज के समय में जीवन यापन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है पैसा. हर देश में इसकी कीमत अलग-अलग होती है. जिस देश की करेंसी सबसे ज्यादा होती है, वह सबसे विकसित देश होता है. अगर भारतीय रुपए की बात करें तो पिछले कुछ सालों से इसमें लगातार गिरावट आ रही है. अगर पिछले 10 सालों की बात करें तो रुपए में काफी गिरावट देखने को मिली है. 10 साल पहले अप्रैल 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया 60.32 के स्तर पर था, लेकिन अब यह 86.62 के स्तर पर पहुंच गया है. अब समझते हैं कि आने वाले समय में रुपए पर क्या असर पड़ेगा.

आज से 100 साल पहले भारत एक आजाद देश नहीं था और न ही उस समय अमेरिका के साथ ट्रेड रेगुलटरी होती थी. जिसके कारण उस समय रुपये Vs डॉलर को लेकर कोई बात नहीं थी. बता दे, रुपया को अंग्रेजों ने शुरू किया था. उस समय रूपए की कीमत बहुत ज्यादा थी, क्योंकि ब्रिटिश राज्य के अधीन उस समय पाउंड की वैल्यू भी बहुत ज्यादा थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक, 1925 में एक डॉलर की कीमत करीब 2.76 रुपये बताई जाती है. 

इस रिपोर्ट की माने तो पिछले 100 सालों में रुपया अपनी वास्तविक क्रय पावर को लेकर बहुत कमजोर हुआ है. जैसे की उदहारण दे तो 1925 से पहले 1 रूपए में बहुत कुछ खरीद सकते थे, उस समय 1 पैसे की भी बहुत कीमत थी. लेकिन आज के समय में इसकी कोई कीमत नहीं है. साल 1944 में दुनिया में पहली बार ब्रिटन वुड्स एग्रीमेंट पास हो जाता है. इस एग्रीमेंट के तहत दुनिया की हर करेंसी का रेट फिक्स किया जाता है. जब 1947 में भारत आजाद हुआ तब करीब सभी देशों ने इस एग्रीमेंट को अपने वाला लागू कर दिया था. इसके बाद रुपये Vs डॉलर का पंगा शुरू हुआ. 

 
कैसे बदला मुद्रा का मूल्य?

  • 1920 के दशक में रुपये की क्रय शक्ति काफी मजबूत थी. उस समय मुद्रा का मूल्य सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं पर आधारित था.
  • 1947: 1 रुपया = 1 अमेरिकी डॉलर

भारत की स्वतंत्रता के समय रुपये की स्थिति मजबूत थी और यह डॉलर के बराबर था.

  • 1970 का दशक: आर्थिक अस्थिरता की शुरुआत

वैश्विक तेल संकट और मुद्रास्फीति के कारण रुपये की क्रय शक्ति में गिरावट आने लगी.

  • 1947 से 1971 तक मुद्रा स्थिर रही, लेकिन इसके बाद गिरावट शुरू हुई.
  • 1971-1991: आर्थिक संकट और अस्थिरता

वैश्विक आर्थिक संकट और घरेलू आर्थिक अस्थिरता के कारण रुपये की स्थिति कमजोर हुई.

  • 1991-2010: वैश्वीकरण और आर्थिक सुधार
  • 1991 के आर्थिक सुधार और मुक्त बाजार नीतियों के बावजूद रुपये में गिरावट जारी रही.
  • 1992-1999: आर्थिक सुधारों के बावजूद रुपये की कीमत कम होती रही.
  • 2008: वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते रुपये में तेज गिरावट आई.
  • 2013: रुपये में बड़ी गिरावट

कारण: विदेशी निवेश में कमी और व्यापार घाटा.

परिणाम: 1 USD = 68 रुपये तक पहुंच गया.

  • 2020: COVID-19 महामारी का प्रभाव

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण रुपये की स्थिति और कमजोर हो गई.

मूल्य: 1 USD ≈ 76 रुपये.

  • 2023-2025: रुपये की गिरावट जारी
  • 2023: रुपये की स्थिति में और गिरावट आई.
  • 2025: रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया.

रुपये का सफर ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. आर्थिक संकट, वैश्विक अस्थिरता और घरेलू नीतिगत कमज़ोरियों ने रुपये को प्रभावित किया है. अब रुपये को मज़बूत करने के लिए मज़बूत आर्थिक सुधारों और नीतियों की ज़रूरत है.

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