नई दिल्ली: नीट (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और देश भर में जारी छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. जंतर-मंतर पर लगातार बन रही स्थिति, छात्रों के असंतोष और विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्होंने राष्ट्रहित और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए यह कठोर फैसला लिया है.
धर्मेंद्र प्रधान ने एक पत्र जारी कर अपने इस्तीफे के पीछे की वजह साझा की है. उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई गड़बड़ी उनके लिए बेहद पीड़ादायी थीं. यद्यपि सरकार ने संज्ञान लेते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई और अगले वर्ष से इसे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया, फिर भी छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने के लिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा.
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
अपने इस्तीफे के पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने भावुक होते हुए लिखा कि चार दशकों से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं. उन्होंने कहा, 20 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी. हमने पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया ताकि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण खराब न हो.
उन्होंने आगे लिखा कि जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में बन रही स्थिति का कोई राष्ट्र विरोधी तत्व गलत फायदा न उठा सके तथा छात्रों का ध्यान पढ़ाई से न भटके, इसलिए उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री जी को सौंपा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवाशक्ति की गरिमा को बनाए रखने का संकल्प है.
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, सहयोग और विश्वास के लिए उनका आभार व्यक्त किया. साथ ही उन्होंने मंत्रिपरिषद के साथियों और मंत्रालय के अधिकारियों का भी धन्यवाद किया. पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि प्रभु श्री जगन्नाथ जी के आशीर्वाद से वे भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर समर्पित रहेंगे.