पश्चिम एशिया में जारी विनाशकारी संघर्ष के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख ने इस पर सस्पेंस बरकरार रखा है. एक्सियोस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ प्रस्तावित 45 दिनों के संघर्ष-विराम प्रस्ताव को फिलहाल मंजूरी नहीं दी है. जहां एक तरफ पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका का घातक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अपनी पूरी तीव्रता के साथ चल रहा है.
वैश्विक उथल-पुथल को देखते हुए पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थ इस युद्ध को समाप्त कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि 45 दिनों के इस सीजफायर प्लान का मुख्य उद्देश्य यूएस-ईरान-इजरायल त्रिकोण में जारी इस जंग को हमेशा के लिए खत्म करना है. रविवार को सामने आई जानकारी के मुताबिक, मध्यस्थों का एक समूह संघर्ष-विराम की शर्तों पर चर्चा कर रहा है, जिसे युद्ध के स्थायी अंत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
शांति वार्ता के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का तेवर बेहद आक्रामक बना हुआ है. फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान के पास सोमवार तक का समय है. उन्होंने दो टूक लहजे में कहा कि यदि ईरान ने तेजी नहीं दिखाई, तो अमेरिका अपने हमलों को और तेज कर देगा. ट्रंप ने यहां तक धमकी दी कि वे ईरान के तेल भंडारों पर नियंत्रण करने और क्षेत्र में 'सब कुछ उड़ा देने' जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत की गुंजाइश बनाए रखने के लिए उन्होंने ईरानी वार्ताकारों को फिलहाल कुछ राहत दी है.
बता दें कि इस युद्ध की शुरुआत बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद हुई थी. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाईं. इस संघर्ष की वजह से न केवल सामरिक तनाव बढ़ा है, बल्कि वैश्विक ईंधन आपूर्ति को लेकर भी दुनिया भर में चिंताएं गहरा गई हैं. अब पूरी दुनिया की नजरें सोमवार की समयसीमा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या एक और भीषण तबाही की ओर.