नई दिल्ली: भारत में कैंसर के मामले अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं. बदलती लाइफस्टाइल, घंटों तक बैठकर काम करने की आदत, तनाव और खराब खानपान ने 30-40 साल की उम्र के लोगों को भी गंभीर खतरे में डाल दिया है. डॉक्टरों का कहना है कि कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल अब कैंसर जैसी घातक बीमारी की बड़ी वजह बनती जा रही है. तो चलिए जानते है इसपर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.
एक्सपर्ट बताते हैं कि उनके पास ऐसे कई मरीज आते हैं, जिनकी कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल कैंसर की बड़ी वजह बन रही है. डॉक्टर के मुताबिक लोग 11 से 12 घंटे तक लगातार बैठकर काम करते हैं. इस दौरान न खानपान का ध्यान रखा जाता है और न ही शारीरिक गतिविधि होती है. तनाव और नींद की कमी शरीर में कैंसर सेल्स बनने का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती हैं.
एक रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कोलोरेक्टल, एंडोमेट्रियल और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाती है. रिसर्च में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना जिम भी जाता हो और सिगरेट-शराब से दूर हो, लेकिन दिनभर 10 से 12 घंटे बैठा रहता है, तो कैंसर का खतरा बना रहता है. इस स्थिति को एक्टिव काउच पोटैटो सिंड्रोम कहा जाता है, जो भारतीय कर्मचारियों में तेजी से बढ़ रहा है.
घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर में कई ऐसे बदलाव होने लगते हैं, जिन्हें लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही बदलाव आगे चलकर गंभीर बीमारियों और कैंसर का कारण बन सकते हैं.
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक, शहरों में करीब 40% महिलाएं और 34% पुरुष मोटापे से जूझ रहे हैं. लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में जमा फैट सिर्फ ऊर्जा का स्रोत नहीं रहता, लगातार बनी रहने वाली सूजन 13 तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है. इनमें ब्रेस्ट, लीवर, कोलन, किडनी और फेफड़ों का कैंसर शामिल है.
आज के समय में ऑफिस का टार्गेट, परफॉर्मेंस प्रेशर और लगातार काम का तनाव आम हो चुका है. तनाव सीधे तौर पर कैंसर नहीं बनाता, लेकिन यह शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करता है. स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल उन कोशिकाओं को दबा देता है, जो शुरुआती कैंसर सेल्स को खत्म करने का काम करती हैं. ज्यादा तनाव स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ओवरईटिंग और खराब नींद जैसी आदतों को भी बढ़ावा देता है.
लेट नाइट शिफ्ट, लगातार स्क्रीन टाइम और ब्लू लाइट शरीर की सर्केडियन रिदम को प्रभावित करती है. इंटरनेशनल एजेंसी मे भी बताया जाता है कि. कम नींद से DNA रिपेयर प्रक्रिया प्रभावित होती है और हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.
ऑफिस में मिलने वाले वेंडिंग मशीन स्नैक्स, एनर्जी बार और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं. फ्रांसीसी रिसर्च के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन में हर 10% वृद्धि कैंसर के खतरे को 12% तक बढ़ा सकती है.
अगर 3-4 हफ्तों तक लगातार कुछ लक्षण बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इनमें शामिल हैं-
कैंसर से पूरी तरह बचाव का कोई तय तरीका नहीं है, लेकिन लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
एक्सपर्ट बताते हैं कई ऑफिस वेलनेस प्रोग्राम करवाते हैं, जो काफी हद तक अच्छे होते हैं. योगा क्लास या स्टेप चैलेंज जैसी एक्टिविटी में भाग लें और खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करें. असली समस्या नींद की कमी, स्ट्रेस, खानपान है, जिसपर ध्यान नहीं दिया जाता. आप इन चीजों पर थोड़ा ध्यान दें.