नए लेबर कोड के तहत बदल गए नियम, अब एक साल की नौकरी में मिलेगी ग्रेच्युटी

नए लेबर कोड के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को अब केवल एक साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी मिलेगी, जिससे प्रोजेक्ट आधारित नौकरी करने वालों को बड़ी राहत और आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद है.

Date Updated Last Updated : 06 April 2026, 06:35 PM IST
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Courtesy: Social Media

देश में श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है. अब तक जहां कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल तक नौकरी करना जरूरी था, वहीं नए लेबर कोड के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही यह लाभ मिल सकेगा. इस बदलाव को खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत माना जा रहा है, जो कॉन्ट्रैक्ट या प्रोजेक्ट बेस्ड काम करते हैं.

क्या है फिक्स्ड-टर्म रोजगार

फिक्स्ड-टर्म रोजगार का मतलब है कि कर्मचारी को एक निश्चित अवधि के लिए कंपनी में रखा जाता है. यह अवधि आमतौर पर एक या दो साल की होती है. पहले ऐसे कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं. लेकिन अब उन्हें कंपनी के पेरोल पर रखा जाएगा और सैलरी, छुट्टियां और अन्य लाभ भी स्थायी कर्मचारियों के बराबर दिए जाएंगे.

ग्रेच्युटी नियम में बड़ा बदलाव

पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल की सेवा पूरी करना जरूरी था. अब नए नियम के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी केवल एक साल की निरंतर सेवा के बाद ही इसके हकदार होंगे. यदि कोई कर्मचारी एक साल तीन महीने काम करता है, तो उसे पूरे 15 महीनों की ग्रेच्युटी मिलेगी. यह बदलाव छोटे समय के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.

क्यों किया गया यह बदलाव

सरकार ने यह बदलाव उन कर्मचारियों को ध्यान में रखकर किया है, जो अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर सीमित अवधि के लिए काम करते हैं. ऐसे कर्मचारियों को पहले लंबे समय तक काम करने के बाद ही ग्रेच्युटी मिलती थी, जिससे उन्हें नुकसान होता था. अब इस नियम से उन्हें उनके काम के अनुसार उचित लाभ मिल सकेगा और आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ेगी.

सैलरी स्ट्रक्चर पर असर

नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी को कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत रखना होगा. इससे ग्रेच्युटी और पीएफ का कैलकुलेशन भी बढ़ेगा. अगर किसी कर्मचारी के अलाउंस 50 प्रतिशत से ज्यादा हैं, तो अतिरिक्त राशि बेसिक सैलरी में जोड़ दी जाएगी. इससे कर्मचारियों को भविष्य में ज्यादा लाभ मिलेगा.

जल्दी होगा भुगतान

नए नियमों के तहत कर्मचारियों के फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है. अब कंपनी को कर्मचारी के इस्तीफे, निकाले जाने या कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद 48 घंटों के भीतर सभी बकाया राशि और ग्रेच्युटी का भुगतान करना होगा. इससे कर्मचारियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें समय पर उनका पैसा मिल सकेगा.

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