नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब लाल सागर के व्यापारिक मार्ग पर भी जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है. सप्लाई चैन में आए इस अचानक अवरोध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह 10 फीसदी की जोरदार तेजी दर्ज की गई. जिससे गुरुवार को ब्रेंट क्रूड मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया.
पश्चिम एशिया का नया संकट
हालांकि हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को थोड़ी राहत देखने को मिली. मुनाफावसूली और वैश्विक बातचीत की सुगबुगाहट के बीच कच्चे तेल में करीब चार फीसदी की गिरावट आई. शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 3.88 प्रतिशत (3.91 डॉलर) टूटकर 96.78 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 3.12 प्रतिशत (2.88 डॉलर) गिरकर 89.31 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया.
कितना महंगा हुआ पेट्रोल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस उथल-पुथल का सीधा असर भारत की तेल कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता दिख रहा है. मई महीने में घरेलू स्तर पर पेट्रोलियम कंपनियों ने किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ाए थे. 15 मई को पेट्रोल में 3 रुपये और डीजल में 3.29 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी. इसके बाद 19 मई और 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हुआ, जबकि 25 मई को पेट्रोल में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई.
पेट्रोल-डीजल के दाम
वर्तमान में देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल-डीजल ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. मुंबई में पेट्रोल का भाव 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है. वहीं कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर दर्ज किया गया है. चेन्नई में ग्राहकों को 107.77 रुपये में पेट्रोल और 99.55 रुपये में डीजल मिल रहा है. अन्य शहरों की बात करें तो नोएडा में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 97.56 रुपये प्रति लीटर है, जबकि चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.51 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है.
भारी नुकसान का सामना
भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को जून तिमाही में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जबकि इंडियन ऑयल (IOCL) के तिमाही नतीजों पर भी बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं. यदि लाल सागर का संकट लंबा खींचता है, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.