Petrol Diesel Price: कच्चे तेल के दामों में आई गिरावट, पेट्रोल-डीजल पर नहीं पड़ा असर

26 अगस्त को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI क्रूड सस्ता हुआ है. देश के प्रमुख शहरों में आज ईंधन की कीमतें स्थिर हैं.

Date Updated Last Updated : 26 August 2026, 12:37 PM IST
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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: देश में आज ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. 26 अगस्त 2026 को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम पहले की तरह ही रखे हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. ऐसे में ग्लोबल मार्केट में आई इस गिरावट का असर फिलहाल भारतीय ग्राहकों को मिलने वाली कीमतों पर दिखाई नहीं दे रहा है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.23% गिरकर 86.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड भी 1.72% की गिरावट के साथ 80.94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के रिटेल रेट में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है. 

आखिरी बार कब बदली थी कीमत?

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 25 मई के बाद से लगभग स्थिर हैं. उस समय सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद से बड़े शहरों में कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है. यानी वाहन चालकों को लंबे समय से लगभग इन्हीं दरों पर पेट्रोल और डीजल मिल रहा है.

देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 113.43 रुपये, मुंबई में 111.12 रुपये, चेन्नई में 107.75 रुपये, हैदराबाद में 115.69 रुपये और बेंगलुरु में 110.93 रुपये प्रति लीटर है. दिल्ली में डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 99.78 रुपये, मुंबई में 97.78 रुपये, चेन्नई में 99.57 रुपये, हैदराबाद में 103.82 रुपये और बेंगलुरु में 98.79 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.

ईरान को लेकर अमेरिका का दबाव बढ़ा

फरवरी 2026 से अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब आर्थिक मोर्चे पर भी तेज हो गया है. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है, जिसे बड़े प्रतिबंध अभियान के तौर पर देखा जा रहा है. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ व्यापार या आर्थिक लेनदेन जारी रखने वाले देशों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. उसका खास निशाना चीन है, जो ईरान से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश है. 

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