Raksha Bandhan 2026: आज देशभर में मनाया जा रहा रक्षाबंधन, जानिए शुभ मुहूर्त

इस साल रक्षाबंधन पर एक विशेष खगोलीय घटना भी जुड़ रही है साल का आखिरी चंद्रग्रहण। हालांकि, भारतीय ज्योतिष और पंचांग के अनुसार यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई धार्मिक या सूतक प्रभाव नहीं माना जाएगा।

Date Updated Last Updated : 28 August 2026, 11:07 AM IST
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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: सावन महीने की पूर्णिमा का यह पावन अवसर पूरे देश में अपार उत्साह और उमंग लेकर आया है। भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार आज देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास है, क्योंकि इस दिन एक ओर जहां खगोलीय घटना के रूप में साल का अंतिम चंद्रग्रहण दर्ज हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रहों और नक्षत्रों के अद्भुत मेल से 11 शुभ योग बन रहे हैं। राहत की बात यह है कि भारतीय पंचांग के अनुसार यह चंद्रग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, जिससे इसका धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं है। इसके साथ ही इस बार त्योहार पर भद्रा का कोई साया नहीं है, जिससे श्रद्धालु पूरे दिन निश्चिंत होकर पूजा-पाठ और राखी बांधने का विधान पूरा कर रहे हैं।

शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

शास्त्रों के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। भद्रा काल 27 अगस्त रात 9:32 बजे समाप्त हो चुका है, इसलिए 28 अगस्त को राखी बांधने के कई शुभ मुहूर्त हैं। सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक का समय विशेष फलदायी माना गया है। 

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से दोपहर 12:48 बजे तक और दोपहर 1:44 से शाम 4:16 बजे तक का समय भी शुभ है। वहीं राहु काल 10:46 से 12:22 बजे और यमगंड 3:35 से 5:11 बजे तक रहेगा, इसलिए इन समयों में राखी बांधने से बचना चाहिए।

ग्रहों का दुर्लभ संयोग और 11 मंगलकारी योग

ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से इस बार का रक्षाबंधन अत्यंत समृद्ध और कल्याणकारी सिद्ध हो रहा है। शतभिषा नक्षत्र के साथ शिव, शोभन, अतिगंड और विजय योग का सुंदर संगम बन रहा है। ग्रहों की स्थिति देखें तो सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान हैं और गुरु कर्क राशि में स्थित होकर ज्ञान व समृद्धि का संकेत दे रहे हैं। 
चंद्रमा के कुंभ राशि में होने से बुधादित्य, विमल, सुनफा और धन योग समेत कुल 11 दुर्लभ योगों की रचना हो रही है। मान्यताओं के अनुसार इन विशिष्ट योगों में रक्षासूत्र बांधने से भाई-बहन दोनों के जीवन में यश, कीर्ति और सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। इसके साथ ही इस बार त्योहार पर भद्रा का कोई साया नहीं है, जिससे श्रद्धालु पूरे दिन निश्चिंत होकर पूजा-पाठ और राखी बांधने का विधान पूरा कर रहे हैं।

शास्त्रीय विधि और पौराणिक गाथाएं

रक्षाबंधन के दिन शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए बहनें प्रातःकाल स्नान के बाद पूजा की थाली में रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, मिठाई और राखी सजाती हैं। भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है और दोनों का सिर ढका होना अनिवार्य माना जाता है। माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाकर कलाई पर रक्षासूत्र बांधा जाता है और आरती उतारकर लंबी उम्र की प्रार्थना की जाती है। इस परंपरा का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता इंद्राणी ने तपोबल से निर्मित रक्षासूत्र देवराज इंद्र को बांधकर दैत्य वृत्रासुर पर विजय दिलाई थी। वहीं इतिहास में रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को भेजी गई राखी यह संदेश देती है कि यह धागा सीमाओं से परे जाकर केवल सुरक्षा और सम्मान के संकल्प को जीवंत रखता है।

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