नई दिल्ली: इस्लाम धर्म के सबसे पाक और बड़े त्योहारों में से एक ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद को लेकर इस साल भी आम लोगों के बीच तारीखों का भ्रम बना हुआ है. सोशल मीडिया और विभिन्न स्रोतों में यह चर्चा जोरों पर है कि यह त्योहार 27 मई को मनाया जाएगा या 28 मई को.
अलग-अलग देशों में तारीखें
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, सभी त्योहार चांद के दर्शन पर निर्भर करते हैं, जिसकी वजह से भौगोलिक स्थितियों के अनुसार अलग-अलग देशों में तारीखें बदल जाती हैं. भारत में बकरीद की सही तारीख को लेकर असमंजस में हैं तो देश की प्रमुख चांद कमेटियों ने इसकी पुष्टि कर दी है कि यह त्योहार 28 मई को मनाया जाएगा.
खाड़ी देशों और भारत की तारीखों में अंतर
सऊदी अरब सहित अधिकांश गल्फ कंट्रीज में चांद का दीदार पहले हो जाने के कारण वहां ईद-उल-अज़हा आज यानी 27 मई को मनाई जा रही है. जबकि भारतीय उपमहाद्वीप में चांद एक दिन बाद नजर आने की वजह से यहां 28 मई को बकरीद मनाई जाएगी. यह त्योहार पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए त्याग, धैर्य और आपसी भाईचारे का संदेश लेकर आता है.
बकरीद को क्या कहते है?
बकरीद को 'कुर्बानी की ईद' कहा जाता है और यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम की खुदा के प्रति अटूट आस्था, उनके सर्वोच्च त्याग और बिना किसी शर्त के समर्पण की याद में मनाया जाता है. इस पर्व का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हर इंसान को अल्लाह की रजा में राजी रहने, परोपकार करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की सीख देता है.
इस पर्व के दौरान तीन मुख्य विशेषताएं देखने को मिलती हैं:
विशेष नमाज
बकरीद के दिन सुबह के वक्त मुस्लिम समुदाय के लोग नए वस्त्र पहनकर ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में एकत्र होते हैं और विशेष नमाज अदा करते हैं.
कुर्बानी की रस्म
नमाज के बाद तय इस्लामिक नियमों के अनुसार हलाल जानवर की कुर्बानी दी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य समाज के निर्धन और जरूरतमंद लोगों तक भोजन और मदद पहुंचाना है.
आपसी सौहार्द और दावतें
नमाज और कुर्बानी के बाद लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं और घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं.
मक्का में पवित्र हज
यह त्योहार मक्का में होने वाली पवित्र हज यात्रा के अंतिम दिनों के साथ मेल खाता है. इस समय पूरी दुनिया के मुसलमानों के बीच दान-पुण्य और परोपकार की भावना अपने चरम पर होती है और अमीर-गरीब का भेद भूलकर समाज के सभी वर्ग एक साथ खुशियां मनाते हैं.