'चोरी में मेरी कोई भूमिका नहीं', राम मंदिर चोरी केस में चंपत राय से 3 घंटे तक पूछताछ

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और प्रसाद से जुड़े कथित चोरी के मामले में जांच एजेंसियों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से विस्तृत पूछताछ की है. सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने चढ़ावे के रखरखाव और निगरानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल किए है.

Date Updated Last Updated : 30 June 2026, 01:50 PM IST
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Courtesy: AI generated

लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और प्रसाद से जुड़े कथित चोरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. वहीं अब इस मामले में जांच एजेंसियों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से विस्तृत पूछताछ की है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनसे करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए है, जिसमें मंदिर के प्रशासनिक कामकाज, चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और शिकायत निवारण प्रणाली से जुड़े कई मुद्दों पर जानकारी ली गई हैं. इस दौरान जांच में क्या कुछ सामने आया है, चलिए जानते है. 

चढ़ावे के रखरखाव को लेकर किए गए सवाल 

सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने चढ़ावे के रखरखाव और निगरानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल किए है. इस के चलते अब जांच टीम चंपत राय के बयान का अन्य गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों से मिलान कर रही है. वहीं अगर जांच के दौरान दिए गए बयान में कुछ भी अर्थहीन लगता है तो चंपत राय को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. 

जांच में क्या बोले चंपत राय

बता दें, पूछताछ के दौरान चंपत राय ने चोरी की घटना में अपनी किसी भी व्यक्तिगत भूमिका से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने पुलिस को बताया कि जैसे ही वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल आवश्यक कदम उठाए. उनके अनुसार, संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई उनकी पहल पर ही शुरू हुई और स्थानीय थाने में तुरंत प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई. 

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मंदिर में प्रतिदिन आने वाले चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासनिक रूप से उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था. इसके साथ ही जांच के दौरान जब मुख्य आरोपी तिन्नू यादव के बारे में सवाल किया गया तो राय ने बताया कि वह लंबे समय से ट्रस्ट से जुड़ा हुआ था. उन्होंने कहा कि किसी पुराने सहयोगी पर इस तरह के आरोप लगना उनके भी चौंकाने वाला है. 

ट्रस्ट में भर्ती को लेकर उठे सवाल 

जांच एजेंसियों ने ट्रस्ट की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए है. इस दौरान  विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की गई कि कर्मचारियों की नियुक्ति किस आधार पर की जाती है और क्या इसमें रिश्तेदारों या परिचितों को प्राथमिकता दी गई. इस पर चंपत राय ने कहा कि नियुक्तियां सामूहिक निर्णय के तहत की जाती हैं और प्राथमिकता जरूरतमंद लोगों को दी जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि भर्ती संबंधी फैसलों में ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल रहते हैं.

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. अधिकारियों का ध्यान मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित चूक, चोरी की वास्तविक रकम और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने पर केंद्रित है. अब देखना होगा की जांच  के बाद अब और क्या कुछ सामने आता है. 

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