'मैं अपनी मर्जी से जीना ..' 19 साल की बहादुर का कोर्ट में ऐलान! 40 साल के पति छोड़ साथी के साथ जाने की इजाजत

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में एक फैसला सुना गया. याचिका युवती के पति अवधेश द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नामक व्यक्ति ने अवैध रूप से अपने पास रखा है.

Date Updated Last Updated : 06 April 2026, 02:11 PM IST
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Courtesy: Pinterest

मध्य प्रदेश की कोर्ट से एक ऐसा फैसला सामने आ रहा है जिसमें सबको हैरान कर दिया है. इस कोर्ट में एक युवती ने अपने अधिकारों की ऐसी मुखर आवाज उठाई जिसे अदालत भी ठुकरा नहीं पाई. एक अदालत कक्ष में खड़े होकर 19 वर्षीय युवती ने अपने जीवन को लेकर ऐसा स्पष्ट और दृढ़ फैसला सुनाया, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी. परिवार, पति और समाज के दबाव के बीच उसने अपनी इच्छा और खुद को सबसे ऊपर रखा और साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी शर्तों पर जीवन जीना चाहती है.

यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ में सुना गया. याचिका युवती के पति अवधेश द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नामक व्यक्ति ने अवैध रूप से अपने पास रखा है. अदालत के निर्देश पर पुलिस ने युवती को खोजकर पेश किया, जहां उसने अपनी मर्जी से निर्णय रखने की बात कही.

युवती का स्पष्ट रुख

सुनवाई के दौरान युवती ने साफ किया कि वह बालिग है और अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है. उसने अपने पति और माता-पिता के साथ रहने से इनकार करते हुए अपने साथी के साथ रहने की इच्छा जताई.

विवाह और असंतोष की कहानी

जब जजों ने उससे पूछा कि वह क्या चाहती है, तो उसने जरा भी संकोच किए बिना अपना बात रखी. 
युवती ने अदालत को बताया कि उसकी शादी उससे 21 साल बड़े अवधेश से कराई गई थी, यानी जब वह 19 साल की थी तब उसके पति 40 साल के थे. युवती ने आगे कहा कि वह इस रिश्ते से बिलकुल भी खुश नहीं थी और  साथ ही उन्होंने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया. 

परामर्श का भी असर नहीं

अदालत ने उसे सोचने और समझने के लिए काउंसलिंग का अवसर दिया, लेकिन इससे उसके फैसले में कोई बदलाव नहीं आया. उसने दोबारा स्पष्ट किया कि वह अपने साथी के साथ ही रहना चाहती है. इसके साथ ही उसके बगल में खड़े उसके साथी ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह उसकी देखभाल करेगा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा.

अदालत का फैसला

न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की पीठ ने कहा कि जब महिला बालिग है और किसी अवैध बंधन में नहीं है, तो उसकी इच्छा सर्वोपरि है. इसके साथ ही अदालत ने उसे अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जाने की अनुमति दे दी.

सुरक्षा के लिए निगरानी

अदालत ने एहतियात के तौर पर छह महीने तक निगरानी का निर्देश दिया. इस दौरान एक नामित अधिकारी उसकी सुरक्षा और स्थिति पर नजर रखेगा. छह महीने तक, 'शौर्य दीदी' के रूप में नामित अधिकारी महिला की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए उसके संपर्क में रहेंगे.

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