भारतीय सीमा के करीब चीन की बड़ी साजिश, तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण शुरू, भारत की बढ़ी चिंता

चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांधों में से एक के निर्माण की शुरुआत कर दी है. बता दें, इस परियोजना का निर्माण भारतीय सीमा के करीब 50 किमी की दूरी पर किया जा रहा है.

Date Updated Last Updated : 17 June 2026, 02:02 PM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: चीन ने तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर बांधों में से एक के निर्माण की शुरुआत कर दी है. बता दें, इस  परियोजना का निर्माण भारतीय सीमा के करीब 50 किमी की दूरी पर किया जा रहा है. जिसके चलते अरुणाचल प्रदेश और असम में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है चीन की इस परियोजना की घोषणा के बाद से ही भारत की चिंताएं बढ़ गई है. 

भारत को किन-किन तरीकों से होगा नुकसान 

इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि इस बांध का प्रभाव केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका असर सीमा पार बहने वाली नदी के प्रवाह और उससे जुड़े करोड़ों लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है. बता दें, यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर भारत में सियांग नदी के रूप में प्रवेश करती है और आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र का रूप लेती है.

यह नदी पूर्वोत्तर भारत की कृषि, जल आपूर्ति और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में नदी के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर बांध का निर्माण होने से भारत की रणनीति और पर्यावरण दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है. 

पीने के पानी में आ सकती है 

इसके साथ ये भी अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर भविष्य में चीन नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने की स्थिति में पहुंचता है, तो इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है. पानी के बहाव में कमी आने से खेती और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जबकि अचानक अधिक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका भी बनी रहती है.

भारत सरकार की नजर 

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस परियोजना से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रही है. संबंधित एजेंसियां सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकी माध्यमों से स्थिति की निगरानी कर रही हैं. इसके साथ ही, पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है.

भारत ने चीन से सीमा पार नदियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बरतने और समय-समय पर जल प्रवाह संबंधी आंकड़े साझा करने की मांग भी की है. हालांकि चीन का दावा है कि यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन के उद्देश्य से बनाई जा रही है, लेकिन भारत के लिए यह जल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है. इसलिए भारत सरकार इस मामले पर पूरी नजर बनाए हुए है. 

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