'शांति नहीं, संघर्ष को तेज करने की जरूरत...', युद्धविराम प्रस्ताव खारिज करने के बाद US-इजरायल पर भड़के मोजतबा खामेनेई

रिपोर्ट के अनुसार, दो देशों की ओर से ईरान को तनाव कम करने के लिए प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन खामेनेई ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई.

Date Updated Last Updated : 17 March 2026, 09:02 PM IST
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नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी तरह के समझौते या युद्धविराम के प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात में शांति नहीं, बल्कि संघर्ष को और तेज करने की आवश्यकता है. यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और हालात गंभीर बने हुए हैं.

ईरान ने प्रस्ताव को ठुकराया

रिपोर्ट के अनुसार, दो देशों की ओर से ईरान को तनाव कम करने के लिए प्रस्ताव दिए गए थे, लेकिन खामेनेई ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने पहले उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कड़े कदम उठाने और जवाबी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं.

इजरायल का बड़ा दावा

इसी बीच इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े बसीज संगठन के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी को एक हवाई हमले में मार गिराया है. इसके अलावा इजरायल की ओर से एक और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लीजरानी को निशाना बनाने का दावा भी किया गया है. हालांकि. इस संबंध में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने बयान जारी कर कहा कि दोनों ईरानी नेताओं को हाल ही में किए गए हमलों में खत्म कर दिया गया है. इजरायली सेना का कहना है कि सुलेमानी की अगुवाई में बसीज बल ने ईरान में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई की थी, जिसमें व्यापक हिंसा और गिरफ्तारियां शामिल थी.

ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तेज

दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. खबरों के मुताबिक, उसने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ा दिए हैं और खाड़ी क्षेत्र में कई रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया है. संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा स्थित एक तेल सुविधा पर हमला भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है. हाल के दिनों में ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाए जाने के बावजूद तेहरान का रुख और अधिक सख्त होता जा रहा है.

विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि निकट भविष्य में किसी भी तरह के समझौते या शांति की संभावना बेहद कम है. बढ़ते सैन्य टकराव और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों के चलते यह संकट वैश्विक स्तर पर गंभीर रूप ले सकता है.

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