इलेक्शन कमीशन के इस फैलसे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC, जानें क्या है पूरा मामला!

तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार (01 मई 2026) को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मतगणना पर्यवेक्षक के तौर पर केवल केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था।

Date Updated Last Updated : 01 May 2026, 08:55 PM IST
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Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार (01 मई 2026) को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पार्टी ने चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी है जिसमें 4 मई को वोटों की गिनती के लिए हर टेबल पर कम से कम एक काउंटिंग सुपरवाइजर या असिस्टेंट को केंद्र सरकार या PSU का कर्मचारी होना जरूरी बताया गया है। TMC ने मामले पर तुरंत सुनवाई की मांग की। सूत्रों के मुताबिक भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इसे शनिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

ममता का बड़ा आरोप 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान बढ़े तनाव के बीच सामने आया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि "बाहर से आए पर्यवेक्षकों" और बंगाल से अनजान पुलिस अधिकारियों की तैनाती TMC कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए की जा रही है। उनके इस बयान से सियासी माहौल और गरमा गया। दूसरे चरण में TMC और BJP कार्यकर्ताओं के बीच कई जगह झड़पें भी हुईं।

अतिरिक्त CEO के आदेश पर विवाद   

हाल ही में पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया कि हर काउंटिंग टेबल पर काउंटिंग सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से एक व्यक्ति केंद्र सरकार या PSU का होना अनिवार्य है। TMC ने LiveLaw की रिपोर्ट के हवाले से इस निर्देश को चुनौती दी।

पार्टी का तर्क है कि ऐसा आदेश सिर्फ चुनाव आयोग जारी कर सकता है, अतिरिक्त CEO नहीं। TMC ने कहा कि यह निर्देश आयोग की हैंडबुक के खिलाफ है। हैंडबुक में काउंटिंग सुपरवाइजर या असिस्टेंट के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति अनिवार्य नहीं है।

TMC ने दी ये दलील 

TMC ने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर आमतौर पर केंद्रीय सेवाओं से ही आते हैं, लेकिन काउंटिंग स्टाफ पर भी यही शर्त लागू करना मनमाना है। TMC का आरोप है कि यह कदम सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए उठाया गया, जो भेदभाव है।

याचिका में TMC ने आशंका जताई कि केंद्र सरकार के कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि केंद्र पर एक राजनीतिक दल का नियंत्रण है। ऐसे में वोटों की गिनती में सभी दलों को बराबर मौका नहीं मिलेगा और निष्पक्षता पर असर पड़ेगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका 

आपको बताते चलें कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC के तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की हैंडबुक के मुताबिक काउंटिंग स्टाफ केंद्र या राज्य सरकार, किसी भी सेवा से हो सकता है। LiveLaw के अनुसार कोर्ट ने साफ किया कि कर्मचारियों का चयन पूरी तरह चुनाव अधिकारियों के विवेक पर है।

पक्षपात के आरोपों पर हाई कोर्ट ने कहा कि गिनती की प्रक्रिया में पहले से कई सुरक्षा उपाय हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट और CCTV निगरानी मौजूद है। कोर्ट ने कहा कि TMC ने अपनी आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं दिया।

पुरानी कानूनी लड़ाई का जिक्र   

LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने चुनाव से जुड़ी पुरानी कानूनी लड़ाइयों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने माना कि भले ही इस तरह की एक विशेष अनुमति याचिका को सुप्रीम कोर्ट पहले खारिज कर चुका है, लेकिन कानूनी सवाल अभी भी खुला है। सिर्फ शक के आधार पर दखल नहीं दिया जा सकता। याचिका खारिज होने के बाद TMC सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

बंगाल में बढ़ा सियासी पारा   

दरअसल TMC का यह कदम दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान बढ़े तनाव के बीच आया है। TMC और BJP दोनों एक-दूसरे पर डराने और दखल देने के आरोप लगा रहे थे। कई सीटों पर समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। सत्ताधारी पार्टी ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की।

"UP सिंघम" अधिकारी पर भी उठे सवाल   

उत्तर प्रदेश के सीनियर पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा भी विवादों में आए। उन्हें "UP सिंघम अधिकारी" कहा जाता है। उन्होंने TMC के एक उम्मीदवार को वोटिंग में रुकावट या सुरक्षाकर्मियों को चुनौती देने पर कड़ी चेतावनी दी थी। TMC ने IPS अधिकारी के रवैये की आलोचना की। आरोप लगाया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं को डरा रहे हैं। वहीं BJP ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष वोटिंग के लिए कड़ी सुरक्षा जरूरी है।

केंद्रीय बलों पर भी गंभीर आरोप  

गौरतलब है कि इतना तनाव तब और बढ़ा जब TMC के सीनियर नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि हावड़ा में केंद्रीय बलों ने एक बुजुर्ग को धक्का दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बुजुर्ग अपने बेटे की मदद से बूथ में घुसने की कोशिश कर रहा था।

इस आरोप से केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर TMC का हमला और तेज हो गया। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक इस दावे पर कोई जवाब नहीं दिया है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर है। शनिवार को सुनवाई में साफ होगा कि काउंटिंग स्टाफ को लेकर चुनाव आयोग का निर्देश बना रहेगा या नहीं।

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