बेरोजगारी दर मार्च में 5 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची, शहरी क्षेत्र में ज्यादा बुरा हाल

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.1 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पांच माह का उच्चतम स्तर है. शहरी इलाकों में बढ़ती बेरोजगारी इसकी मुख्य वजह रही.

Date Updated Last Updated : 15 April 2026, 09:41 PM IST
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भारत में बेरोजगारी ने एक बार फिर सिर उठा लिया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.1 प्रतिशत पर जा पहुंची. फरवरी में यह दर 4.9 प्रतिशत थी. यह पांच महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले अक्टूबर 2025 में बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी. मार्च में बेरोजगारी में जो बढ़ोतरी हुई है, उसकी बड़ी वजह शहरी इलाकों में बढ़ती बेरोजगारी बताई जा रही है.

शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी का ग्राफ चढ़ा

आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी बेरोजगारी दर फरवरी के 6.6 प्रतिशत से बढ़कर मार्च में 6.8 प्रतिशत हो गई. वहीं ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 4.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.3 प्रतिशत पर आ गई. यानी शहरों में रोजगार के मोर्चे पर हालात ज्यादा खराब हुए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी इलाकों में धीमी आर्थिक गतिविधियों और निजी क्षेत्र में नियुक्तियों में कमी के चलते यह स्थिति बनी है. वहीं ग्रामीण इलाकों में मनरेगा और अन्य ग्रामीण रोजगार योजनाओं से कुछ हद तक सहारा मिलता रहा.

पुरुष और महिला बेरोजगारी में भी उछाल

पुरुषों और महिलाओं की बेरोजगारी के आंकड़े भी चिंताजनक हैं. मार्च में पुरुषों की बेरोजगारी दर बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो फरवरी में 4.8 प्रतिशत थी. यह भी पांच महीने का उच्चतम स्तर है. वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई, जो तीन महीने का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर अब भी सीमित हैं, और यह बढ़ोतरी चिंता का विषय है. खासकर शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए काम के तलाश में मुश्किलें और बढ़ गई हैं.  

श्रम बल भागीदारी और रोजगार दर में गिरावट

श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) यानी काम करने या काम की तलाश में लोगों का अनुपात फरवरी के 55.9 प्रतिशत से गिरकर मार्च में 55.4 प्रतिशत रह गया. महिलाओं की भागीदारी दर भी घटकर 34.4 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले महीने 35.3 प्रतिशत थी. वहीं कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) यानी 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी फरवरी के 53.2 प्रतिशत से घटकर मार्च में 52.6 प्रतिशत रह गया. यानी न केवल नौकरियां घट रही हैं, बल्कि काम की तलाश करने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आई है, जो एक गंभीर संकेत है.

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