69,000 रुपये होगी बेसिक सैलरी, 8वें वेतन आयोग के तहत सरकारी कर्मियों की लगेगी लाटरी!

आठवें वेतन आयोग को लेकर नई सिफारिशों में न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये करने, पेंशन सुधार और भत्तों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है. इससे सरकारी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव संभव है.

Date Updated Last Updated : 15 April 2026, 09:21 PM IST
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आने वाला समय बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है. आठवें वेतन आयोग से पहले कर्मचारी संगठनों की ओर से तैयार एक अहम मसौदा सरकार को सौंपा गया है. इस दस्तावेज में वेतन, पेंशन और भत्तों को लेकर कई बड़े सुझाव दिए गए हैं. बढ़ती महंगाई और बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावों को तैयार किया गया है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार को लेना है, लेकिन इन सिफारिशों से उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं.

मसौदे में सबसे अहम मांग न्यूनतम मूल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की है. इसके लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया गया है. यदि यह लागू होता है, तो सभी स्तरों पर वेतन में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि नई वेतन संरचना 1 जनवरी 2026 से बिना देरी लागू की जाए.

वार्षिक वृद्धि और नई वेतन संरचना

मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले हर साल 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों की आय को महंगाई के अनुरूप बनाए रखना है. इसके अलावा मौजूदा 18 वेतन स्तरों को घटाकर केवल 7 स्तर करने की सिफारिश की गई है. इससे प्रमोशन की प्रक्रिया आसान होगी और कर्मचारियों को करियर में ठहराव की समस्या कम होगी.

पेंशन व्यवस्था में बदलाव की मांग

पेंशन को लेकर भी बड़े बदलाव सुझाए गए हैं. सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो 2004 के बाद सेवा में आए हैं. इसके अलावा पेंशन को अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत तय करने और पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है. हर पांच साल में पेंशन संशोधन की भी बात कही गई है.

करियर ग्रोथ और सुविधाओं पर जोर

मसौदे में कर्मचारियों के करियर विकास को भी महत्व दिया गया है. इसमें 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम पांच प्रमोशन या वित्तीय उन्नयन देने का सुझाव है. साथ ही बीमा कवर बढ़ाने, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर बेहतर मुआवजा देने और लीव एनकैशमेंट की सीमा खत्म करने की मांग की गई है.

भत्तों और सामाजिक सुरक्षा में सुधार

भत्तों में भी बदलाव की सिफारिश की गई है. हाउस रेंट अलाउंस को बढ़ाकर न्यूनतम स्तर पर 30 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है, खासकर महानगरों के लिए ज्यादा दर सुझाई गई है. मातृत्व अवकाश को 240 दिन करने, पितृत्व अवकाश बढ़ाने और माता-पिता की देखभाल के लिए विशेष अवकाश देने की भी बात शामिल है. ये सभी सुझाव कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में हैं.

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